Betul News:भू-माफिया बन विवादित जमीन खरीदी,जब मामला बढ़ा तो मासूम बनने लगे भास्कर : रामू टेकाम

भू-माफिया बन विवादित जमीन खरीदी,जब मामला बढ़ा तो मासूम बनने लगे भास्कर : रामू टेकाम

बैतूल – भाजपा की कार्यशैली शुरू से ही आदिवासियों एवं दलितों को दबाने तथा उनका शोषण करने की रही हैं | ग्राम मासोद के सरपंच रहे भास्कर मगरदे, जो अभी भी उपसरपंच हैं एवं इनका ग्राम से लगा ग्राम खेड़ीरामोशी भी हैं,इनको बड़े ही अच्छे तरह से मालूम था कि यह जमीन सस्ते में हम खरीद रहे हैं,यह विवादित जमीन हैं एवं इस पर आदिवासियों का पिछली 3 पीढ़ियों से कब्जा हैं,किन्तु भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष होने के दम पर चलते उनके द्वारा सस्ते में जमीन खरीदी गई कि मैं नेता हूं तो मैं राजनीतिक रसूख बताकर एवं प्रशासन को अपनी तरफ मिलाकर आदिवासियों की कब्जे वाली जमीन हड़प लूंगा किन्तु मामला बढ़ता देख अब मासूम बनकर इसे व्यक्तिगत झगड़ा बता रहे हैं। यदि यह व्यक्तिगत झगड़ा होता तो 15-20 वाहन और जेसीबी लेकर नहीं जाते, ना ही पूरे आदिवासी ग्रामीणों के विरुद्ध रिपोर्ट लिखवाते।उक्ताशय का आरोप भाजपाइयों पर लगाते हुए उक्त बातें आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष श्री रामू टेकाम ने कही,शायद इसलिए कोई भाजपाई किसी आदिवासी के ऊपर पेशाब करता है तो कोई उन्हें पेड़ से बांधकर अमानवीय कृत्य देता है। भाजपा के विधायक संजय पाठक जैसे लोग सैकड़ों एकड़ आदिवासियों की भूमि अपने और अपने सिपहसालारों के नाम करवा लेते हैं।इसी कड़ी में भारतीय जनता युवा मोर्चा जिला बैतूल के अध्यक्ष भास्कर मगरदे द्वारा सैकड़ों वर्षों से काबिज आदिवासियों को उनकी भूमि से बेदखल करने हेतु सत्ता के सहयोग से घमंड चूर होकर ग्राम खेड़ीरामोशी में गुंडे लेकर जाकर प्रशासन के सहयोग से बुजुर्ग आदिवासी का टेंटुआ दबाया और मारपीट शुरू की ,महिलाओं की साड़ी खोलकर उनका चीरहरण का प्रयास किया गया। जब ग्रामीणों द्वारा अपना बीच-बचाव किया गया तो ग्राम के 23 लोगों पर एफआईआर दर्ज करवा दी और इसे व्यक्तिगत मामला बताया जा रहा हैं।यदि उक्त जमीन भास्कर और उनके परिजनों द्वारा हड़पी जाने की साजिश के तहत नहीं खरीदी गई तो अभी जब वह युवा मोर्चा के अध्यक्ष हैं तभी क्यों ग्रामीणों पर आक्रमण कर उनकी जमीन पर कब्जा करने की कार्यवाही की जा रही हैं ।जब पूर्व में ही राजस्व के अधिकारियों द्वारा जमीन को विवादित करार कर दिया गया था एवं मौके पर कब्जा गरीब आदिवासियों का है, तो वह इसे जबरदस्ती कब्जा करने क्यों पहुंचे।क्या भाजपा का यही काम बचा है कि वह अपने लोगों को उच्च पद पर पहुंचाये एवं गरीब आदिवासियों पर जुल्म ढाते हुए उनकी जमीन छीने? यदि जमीन भास्कर मगरदे की थी तो पचासों वर्षों से गरीब आदिवासियों का कब्जा क्यों हैं।भास्कर मगरदे मासोद के सरपंच रहे हैं तथा भारतीय जनता पार्टी, जो आज सत्ता में हैं,उसके युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष हैं। जब उनके कारनामे आम जनता में उजागर हो रहे हैं तो वह इसे व्यक्तिगत मामला बता रहे हैं, जबकि भाजपाइयों की यह परम्परा रही है कि वह सत्ता के नशे में किसी पर भी प्रकरण दर्ज करवा देते हैं। यदि कोई सोशल मीडिया पर सही बात भी ट्वीट कर देता है तो उसको निलंबित कर देते हैं। किसी के पीछे ईडी लगा देते हैं तो किसी के पीछे सीबीआई लगा देते हैं एवं कोर्ट में जाकर सभी झूठे साबित होते हैं।इसके बाद भी यह आम जनता का शोषण करने से नहीं चूकते हैं। कांग्रेस पार्टी के सत्ता में आने के बाद इनके द्वारा शोषण कर जिस भी आदिवासियों की जमीन ली गई है उसे वापस दिलाया जायेगा।

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