Betul News:पत्रकारिता के भेष में घूम रहे दलाल, चार पहिए वाहन से करते हैं वसूली हो रहे मालामाल!

पत्रकारिता के भेष में घूम रहे दलाल, चार पहिए वाहन से करते हैं वसूली हो रहे मालामाल!

पत्रकारिता के भेष में घूम रहे दलाल, चार पहिए वाहन से करते हैं वसूली हो रहे मालामाल!

बैतूल में वैसे तो फर्जी पत्रकारिता की आड़ में दलाली और ठगी का धंधा जोरों पर है। जो आपने आप को वरिष्ठ बताते चलें आ रहे हैं उनकी पत्रकारिता को 40 बरस हो गए हैं लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि उस 40 बरस की पत्रकारिता में लोगों के दरवाजे पर पेपर फेंकते हुए लोगों द्वारा देखा गया है खैर बात तो यह भी सच है कि कहीं ना कहीं कुछ किसी के माध्यम से सीखने को मिलता है हो सकता है उस 40 बरस की पत्रकारिता कहने वाले व्यक्ति ने हॉकर्स के रूप में कुछ नया सीखा और अपने आप को पत्रकार कहलाने और वरिष्ठता का तमका लेकर घूमना फिरना सिखा हो ऐसे पत्रकार की कुछ हरकतें हम आपके साथ साझा कर रहे हैं। अपरिहार्य कारणों से हम इनका नाम सार्वजनिक नहीं कर सकते हैं। दरअसल इस तरह के पत्रकार खबरों की जगह ब्लैकमेलिंग और अवैध वसूली के जुगाड़ में घूमते रहते हैं। और सबसे बड़ी बात यह है कि एक हरी राम नाई की भूमिका में देखने में मिल जाएगा । अधिकारियो के बीच बैठक लोगो के खिलाफ खाना फूशी करते हुए नजर आ जाते हैं हालांकि अधिकारियों द्वारा इस हरिराम नाई की बातों पर ध्यान नहीं दिया जाता क्योंकि उन्हें पता है कि यह एक हरिराम नाई है। जो हरिराम नाई की जेब गर्म कर दे उसके खिलाफ कभी भी अधिकारी के चेंबर में शिकायत नहीं की जाती लेकिन वहीं अगर हरिराम नाई की जेब गर्म ना हो तो वह अधिकारियों के चेंबर से लेकर उन्हें फोन कर सूचना देने में भी पीछे नहीं हटा और यह वही व्यक्ति है जिसने अपने फायदे के लिए पुलिस थाने, ब्लॉक ऑफिस, आरटीओ ऑफिस, नगर पालिका ,शराब के ठेके जैसे कार्यालयों में दलाल बनें इन्हे फर्जी तो नही लेकिन पेपर बांटने वाले हॉकर्स के रूप में जन्मे पत्रकार घूमते रहते हैं ओ भी चार पहिए में और खबरें प्रसारित करने की धमकी देकर वसूली करते हैं। शासन प्रशासन ऐसे फर्जी पत्रकारों जो आपने आप को वरिष्ठ बताते हैं!वैसे पत्रकारिता में हर एक पल नया सीखने को मिलता है यहां पर कोई वरिष्ठ नहीं होता लेकिन फिर भी कुछ तथाकथित पत्रकार अपने आप में वरिष्ठ का तमका लिए घूमते हैं और कभी सोसाइटी समिति तो कभी छात्रावास घूमते हुए नजर आएंगे ऐसे तथा घटित पत्रकारों से सोसाइटी वाले एवं छात्रावास खासे परेशान है। ये शासन प्रशासन एवम सरकार की छवि धूमिल कर रहे हैं। इन लोगों की वजह से सही और शरीफ लोगों का जीना मुहाल हो रहा है। पत्रकारिता की आड़ में लोगों को डराना, धमकाना, वसूली करना, मानसिक शोषण करना इनका धंधा बन चुका है।उल्लेखनीय है कि इस तरह से निजता को समाज मे परोसने के पीछे की मंशा क्या है यह एक गिरोह की तरह अधिकारियों को टार्गेट करते है और अधिकारियों से मोटी रकम की मांग करते है । जब इन्हें पैसे नही मिलता तो यह इस तरह से निजी जीवन को छापकर खुद को पत्रकार समाज का हितैषी बताते है ।इन जैसे ब्लैकमेलरों की वजह से पत्रकारिता अपने कलंकित दौर से गुजर रही है ।अगर इस पर लगाम नही लगाई गई तो वह दिन दूर नही की लोकतंत्र का चौथा स्तंभ अपनी विश्वसनीयता को खो देगा इस पर अंकुश लगाया जाना बेहद जरूरी है ।

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