Betul News:भाजपा में बगावत के बोल! जिलाध्यक्ष पर ‘रबर स्टांप’ और ‘चंपक राय’ जैसे तंज, सोशल मीडिया पोस्टों ने बढ़ाई सियासी हलचल
विधानसभा-132 को लेकर भी खुली नाराजगी, ‘जूते से स्वागत’ से लेकर ‘संगठन खत्म’ तक लिखे गए तीखे शब्द
भाजपा में बगावत के बोल! जिलाध्यक्ष पर ‘रबर स्टांप’ और ‘चंपक राय’ जैसे तंज, सोशल मीडिया पोस्टों ने बढ़ाई सियासी हलचल
विधानसभा-132 को लेकर भी खुली नाराजगी, ‘जूते से स्वागत’ से लेकर ‘संगठन खत्म’ तक लिखे गए तीखे शब्द

बैतूल। भाजपा की राजनीति में इन दिनों सोशल मीडिया पर शब्दों की तलवारें चलती नजर आ रही हैं। पार्टी के जिला अध्यक्ष को लेकर एक भाजपा नेता द्वारा सोशल मीडिया पर की गई कथित टिप्पणियों ने संगठन के भीतर चल रही नाराजगी और खींचतान को चर्चा में ला दिया है।पोस्ट में जिला अध्यक्ष की कार्यशैली और पद तक पहुंचने को लेकर बेहद तीखे कटाक्ष किए गए। यहां तक कि “भीख मांगकर पद लाया साथ ‘चंपतराय’ जैसे शब्दों का भी इस्तेमाल किया गया। भाषा की तीव्रता देखकर सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर पार्टी के अंदर ऐसा क्या चल रहा है कि विरोध अब सोशल मीडिया की दीवार पर खुलकर दिखाई देने लगा है?भाजपा के भीतर सब कुछ सामान्य है या संगठन की सतह के नीचे नाराजगी की खदबदाहट चल रही है? सोशल मीडिया पर Adv. Vivek Jain के नाम से सामने आए पोस्टों ने इस सवाल को हवा दे दी है। सोशल मीडिया पर पोस्ट में पदाधिकारी को पोस्टों में व्यक्ति को क्षेत्र में नहीं आने की चेतावनी दी गई है। पोस्ट में “जूते से स्वागत” जैसी बात, सुधरजा नहीं तो बैतूल भाजपा का खात्मा तेरे दामन पे आयेगा” जैसे शब्द लिखे गए हैं। वहीं एक पोस्ट में “संगठन खत्म 132 विधानसभा से जैसी टिप्पणी भी सामने आई है।पार्टी के अंदर की नाराजगी या सोशल मीडिया का गुस्सा?राजनीतिक दलों में मतभेद होना नई बात नहीं है, लेकिन जब असहमति सार्वजनिक होकर सोशल मीडिया तक पहुंच जाए और भाषा इतनी तल्ख हो जाए, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर नाराजगी की जड़ क्या है?क्या मामला संगठन में उपेक्षा का है? पद और नेतृत्व को लेकर असहमति है? या फिर स्थानीय स्तर पर चल रही किसी राजनीतिक खींचतान का परिणाम है? इन सवालों का जवाब आना अभी बाकी है लेकिन भाजपा को अनुशासित कैडर आधारित संगठन के रूप में देखा जाता है। ऐसे में पार्टी से जुड़े व्यक्ति के नाम से सामने आए इस तरह के पोस्ट संगठन के लिए असहज सवाल जरूर खड़े करते हैं।एक तरफ संगठन की मजबूती के दावे, दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर ‘संगठन खत्म’ के नारे सियासत का यह विरोधाभास अब चर्चा का विषय बन गया है। फिलहाल पोस्टों में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित भाजपा पदाधिकारी का पक्ष भी सामने नहीं आया है। इसलिए इन टिप्पणियों को सोशल मीडिया पर लगाए गए आरोप और दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
