Selfish people:दुनिया में मतलबीपन का बोलबाला: क्या अभी भी बची है इंसानियत?

दुनिया में मतलबीपन का बोलबाला: क्या अभी भी बची है इंसानियत?

आज हम नए युग में भक्ति जिंदगी में इतने बेस्ट व्यस्त हैं कि पने कभी ऐसा लगता है कि दुनिया मतलबी लोगों से भरी पड़ी है। आज के दौर में लोग अक्सर अपने निजी फायदे को प्राथमिकता देते हैं और इस चक्कर में दूसरों की भावनाओं को नजरअंदाज कर देते हैं। रिश्ते, दोस्ती, और यहाँ तक कि पारिवारिक संबंध भी कई बार स्वार्थ की भेंट चढ़ जाते हैं। लेकिन क्या सचमुच पूरी दुनिया ऐसी हो गई है, या फिर हमारे आसपास अभी भी कुछ उम्मीद की किरणें बाकी हैं? आइए, इस विषय पर विस्तार से बात करते हैं।मतलबी पन की जड़ें कहाँ से शुरू होती हैं?आज की तेज़-रफ़्तार ज़िंदगी में लोग असुरक्षा, प्रतिस्पर्धा और अपने अस्तित्व को बनाए रखने की चिंता में डूबे रहते हैं। इस कारण वे अपने लाभ को सबसे ऊपर रखते हैं। चाहे वह नौकरी में तरक्की हो, पैसों की चाहत हो, या सामाजिक रुतबा बढ़ाने की कोशिश—लोग दूसरों का इस्तेमाल करने से नहीं हिचकते। उदाहरण के लिए, आपने देखा होगा कि कुछ लोग तब तक आपके साथ मधुर व्यवहार करते हैं, जब तक उन्हें आपसे कोई फायदा मिल रहा होता है। जैसे ही उनका मकसद पूरा हो जाता है, वे मुड़कर आपकी तरफ देखना भी बंद कर देते हैं। यह व्यवहार न केवल दिल तोड़ता है, बल्कि इंसान के भरोसे को भी कमज़ोर करता है।क्या वजह रही होगी आपके मन में यह ख्याल आने की?आपके मन में यह बात किसी खास वजह से आई होगी शायद कोई ऐसा अनुभव जो हाल ही में हुआ हो। क्या कोई दोस्त, रिश्तेदार या सहकर्मी ने ऐसा कुछ किया जिससे आपको ठेस पहुँची हो ? गलती हर इंसान से होती है लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि उस व्यक्ति को ब्लॉक कर दिया जाए! या फिर आपने समाज में बढ़ते स्वार्थ को करीब से महसूस किया? कई बार छोटी-छोटी घटनाएँ भी हमें इस सच्चाई से रू-ब-रू करा देती हैं कि लोग कितने मतलबी हो सकते हैं। मिसाल के तौर पर, कोई आपकी मदद माँगता है, लेकिन जब आपकी बारी आती है, तो वही शख्स गायब हो जाता है। ऐसे में मन में यह सवाल उठना लाज़मी है कि क्या सचमुच अच्छाई अब बची ही नहीं? फिर भी, उम्मीद की किरणें बाकी हैं यह सच है कि मतलबी लोग हर जगह मौजूद हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि पूरी दुनिया ऐसी ही हो गई है। बीच-बीच में कुछ लोग ऐसे भी मिलते हैं जो बिना किसी स्वार्थ के आपका साथ देते हैं। ये वो लोग हैं जो छोटी-छोटी चीज़ों में खुशी तलाशते हैं और दूसरों की मदद को अपना फ़र्ज़ समझते हैं। मसलन, कोई अजनबी जो सड़क पर आपकी गिरती हुई चीज़ उठाने में मदद करे, या कोई दोस्त जो बिना कहे आपकी परेशानी समझ ले—ये छोटे-छोटे पल हमें याद दिलाते हैं कि इंसानियत अभी ज़िंदा है।

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