घर में ही नहीं जीत पाये भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष और जिला कार्यालय मन्त्री..

अब झूठी वाहवाही लूटने और श्रेयकुमार बनने से भी नहीं रहे चूक..?

घर में ही नहीं जीत पाये भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष और जिला कार्यालय मन्त्री..!

 

अब झूठी वाहवाही लूटने और श्रेयकुमार बनने से भी नहीं रहे चूक..?

 

जिले के बड़े-बड़े भाजपाई चाणक्य और दिग्गजों को करना पड़ी कई रात और दिन कड़ी मशक्क़त..?

आठनेर / बैतूल । अभी हाल ही में सम्पन्न हुए विधानसभा चुनाव में जो छुट भैय्ये नेता अपने घर, गाँव और बूथ में निर्वाचन अपनी ओर करने में भी कामयाब नहीं हो पाये वे अब झूठी वाहवाही लूटने और श्रेयकुमार बनने से भी पीछे नहीं रहना चाहते है, और अपने आका को यह यकीन दिलाने में भी कोई कोर कसर बाकी नहीं रखना चाह रहे है। जबकि यथार्थ का धरातल सबको पता है कि किसकी कितनी मेहनत जमीन से किस स्तर तक इस जीत के लिये क्या मायने रखती है?

 भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष और जिला कार्यालय मन्त्री घर में ही नहीं जीत पाये…

बैतूल विधानसभा में आने वाले आठनेर क्षेत्र आन्तर्गत के नेता द्वारा अपने घर में, गाँव में और बूथ में भी नहीं जीत पाये जिनमे भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष गोवर्धन राने और जिला कार्यालय मन्त्री कृष्णा गायकी के गृह ग्राम हिवरा और बरखेड़ में भाजपा को जीत नसीब नहीं हुई। वहीं ये छुटभैय्ये नेताद्वय अब अपनी झूठी वाहवाही और अन्यान्य प्रपंच रचकर जिले के बड़े पदाधिकारियों से मिलकर पूरी तरह से जीत का श्रेय लेने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे है लेकिन शायद वे यह नहीं जानते की आम जनमानस और वरिष्ठ तथा कनिष्ठ भाजपाई इस स्थिति को बेहतर तरीके से समझ रहे है।

जिले के बड़े-बड़े भाजपाई चाणक्य और दिग्गजों को करना पड़ी कई रात और दिन कड़ी मशक्क़त…

जहाँ तक आम लोगों और अन्य कई संगठन की बात करें तो साफ तौर पर यह स्तिथि स्पष्ट नज़र आती है कि कौन कितने पानी में है तथा किसने कितनी मेहनत भाजपा को जीत दिलाने इस निर्वाचन में की है। यदि इन नेताद्वय के द्वारा ही सबकुछ किया गया है तो फिर आखिर क्यूँ जिले के बड़े – बड़े भाजपाई चाणक्य और दिग्गजों को यहाँ कई रात और दिन कड़ी मशक्क़त करना पड़ी! यह बड़ा सवाल है? जिस पर जिले के वरिष्ठो और पदाधिकारियों सहित कार्यकर्ताओ को भी आत्ममंथन और चिंतन करना नितांत आवश्यक है?

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