Liquor contractors: शराब ठेकेदारों की सल्तनत के आगे प्रशासन मौन! शराब में कीड़ा, आदिवासी की पिटाई
शराब ठेकेदारों की सल्तनत के आगे प्रशासन मौन! शराब में कीड़ा, आदिवासी की पिटाई !

बैतूल, मध्य प्रदेश का एक छोटा-सा शहर, आजकल सुर्खियों में है, और वजह है शराब की बोतल में तैरते ‘कीड़े’! जी हाँ, यह कोई मज़ाक नहीं, बल्कि एक ऐसी सच्चाई है।यह सिर्फ एक भौगोलिक नाम नहीं, यह अब एक प्रतीक है – उस ‘न्यू इंडिया’ का प्रतीक, जहाँ ‘अच्छे दिन’ शायद सिर्फ ठेकेदारों और रिश्वतखोरों के लिए आरक्षित हैं। हाल ही में यहाँ से जो खबरें छनकर आईं, उसने न केवल आत्मा को झकझोर दिया, बल्कि पेट को भी गुदगुदाया (हाँ, अगर आप उस ‘कीड़े’ वाली शराब के उपभोक्ता नहीं हैं तो)। किस्सा कुछ यूं है कि बैतूल में ‘पवित्र पेय’ यानी शराब में ‘कीड़े’ दर्शन दे गए। सिर्फ दर्शन ही नहीं, बल्कि बकायदा बोतल में तैरते हुए, जैसे कोई तैराकी प्रतियोगिता चल रही हो। और इस दिव्य दर्शन के बाद, जब एक ‘अधर्म’ करने वाले पत्रकार ने इस सत्य को उजागर करने की जुर्रत की, तो उसे ‘धमकी’ रूपी प्रसाद भी मिला। अब आप सोच रहे होंगे कि इस पूरी घटना में आबकारी विभाग की भूमिका क्या रही? वही घोड़ाडोंगरी में शराब ठेकेदार के गुर्गों ने एक आदिवासी युवक की पिटाई के साथ साथ अपरहण कर लिए इतने में मन नहीं भरा तो कमरे में बंद कर लगभग दो घंटे तक बेरहमी से पीटा गया अरे साहब! उनकी भूमिका इतनी ‘महान’ है कि इतिहास के पन्नों में स्वर्णिम अक्षरों में लिखी जाएगी – वे ‘मुखदर्शक’ बने रहे!कहते हैं, किसी भी विभाग की सफलता उसके अधिकारियों की मुस्तैदी और दूरदर्शिता पर निर्भर करती है। हमारे बैतूल के आबकारी विभाग ओर पुलिस के अधिकारी तो इस मामले में ‘अद्वितीय’ हैं। उनकी दूरदर्शिता इतनी तीव्र है

कि उन्हें बोतल के अंदर तैरता हुआ ‘कीड़ा’ या फिर बात करे आदिवासी की पिटाई भी नहीं दिखी। उनकी मुस्तैदी इतनी कमाल की है कि पत्रकार को धमकी मिलने के बाद भी उनके कानों पर जूं तक नहीं रेंगती। शायद उनके लिए ‘कीड़े’ प्रोटीन सप्लीमेंट का काम करते होंगे, या फिर वे मानते होंगे कि ये शराब की ‘ऑर्गेनिक’ गुणवत्ता का प्रमाण है।आखिर आजकल सब कुछ ऑर्गेनिक का ही तो जमाना है! कौन जानता है, शायद आबकारी विभाग जल्द ही ‘कीड़ा-युक्त’ शराब को ‘प्रीमियम ऑर्गेनिक बेवरेज’ के नाम से बेचना शुरू कर दे, और हम सब उसे ‘स्वच्छ भारत अभियान’ का हिस्सा मानकर गर्व से पिएं!यह तो कमाल ही है कि एक तरफ सरकारें ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ की बात करती हैं, और दूसरी तरफ आबकारी विभाग ‘ईज ऑफ डूइंग करप्शन’ का जीता जागता उदाहरण पेश कर रहा है।
बैतूल की बोतल-भर कहानी: कीड़ा निकली शराब और ‘मुखदर्शक’ आबकारी की महान गाथा बैतूल!
