Police News:पुलिस और वकीलों के बीच टकराव न्याय का कौन रखवाला?

कानून कानून को दौड़ा दौड़ा कर पिटता देश किस दिशा में जा रहा?

पुलिस और वकीलों के बीच टकराव न्याय का कौन रखवाला?

कानून कानून को दौड़ा दौड़ा कर पिटता देश किस दिशा में जा रहा?

भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था, और इसकी पहचान आपसी भाईचारे से होती थी। लेकिन वर्तमान समय में देश जैसे जैसे नए युग में प्रवेश कर रहा है तो वही लोग अपने आप को जाती धर्म में बाट रहे है।नए सामाजिक एवं राजनीतिक परिवर्तनों के दौर से गुजर रहा है, जहां भाईचारा और सौहार्द खतरे में पड़ता दिख रहा है।पुलिस का कार्य कानून व्यवस्था बनाए रखना है, तो वहीं वकील न्याय दिलाने के लिए अदालतों में लड़ाई लड़ते हैं। लेकिन हाल ही में कई बार ऐसे मामले सामने आए हैं जहां वकील और पुलिस आपस में भिड़ गए। जहा पुलिस और वकीलों के बीच बढ़ते संघर्ष न्याय प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं! वही राजनीतिक दल वोट बैंक की राजनीति के लिए धर्म, जाति और समुदायों को आपस में लड़ाने का काम कर रहे हैं।कई संगठन कानून को हाथ में लेकर खुलेआम सामाजिक तानाबाना बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं।सोशल मीडिया और भ्रामक सूचनाओं का इस्तेमाल कर समाज में नफरत फैलाने के प्रयास हो रहे हैं।कुछ भ्रष्ट पुलिसकर्मियों की वजह से पूरी व्यवस्था पर सवाल उठाए जाते हैं।हालांकि, यह भी सच है कि अधिकांश पुलिसकर्मी अपनी ड्यूटी ईमानदारी से निभाते हैं और कानून व्यवस्था बनाए रखने में लगे रहते हैं।जनता को चाहिए कि वह अच्छे और बुरे के बीच फर्क करे और कानून का सम्मान करे। कानून की अवहेलना करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो।धर्म और जाति के नाम पर नफरत फैलाने वाले नेताओं को जनता सबक सिखाए।वैसे भारत में रहने वाले हर नागरिकों को कानून व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करना चाहिए। यदि समाज में नफरत, हिंसा और टकराव बढ़ते गए, तो भारत अपने मूल पहचान—भाईचारे और एकता—को खो सकता है। हमें यह तय करना होगा कि हम किस दिशा में जाना चाहते हैं—विभाजन और अराजकता की ओर, या समरसता और कानून के सम्मान की ओर?

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