Betul News:कलेक्टर साहब एक नजर इधर भी पंचायतों में यवले का राज सरकारी राशि की कर रहा बंदरबांट!
कलेक्टर साहब एक नजर इधर भी पंचायतों में यवले का राज सरकारी राशि की कर रहा बंदरबांट!

बैतूल।जिले की पंचायती राज व्यवस्था एक गंभीर विषय है क्यों कि ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर हो रही कथित अनियमितताओं और वित्तीय गड़बड़ियों ने पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इन मामलों में बार-बार एक ही नाम सचिव रमेश यवले उभरकर सामने आ रहा है, जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी उंगलियां उठने लगी हैं। वैसे हाल के महीनों में जिले की विभिन्न पंचायतों, खासतौर पर डोडाजाम और कुनखेड़ी, से सामने आई शिकायतों ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया है। डोडाजाम पंचायत में अतिरिक्त प्रभार के दौरान हुए कार्यों को लेकर लागत और गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए, वहीं कुनखेड़ी पंचायत में करीब 14 लाख रुपये के कार्य को लेकर यह आरोप सामने आया कि जमीनी हकीकत कागजी दावों से मेल नहीं खाती। सचिव रमेश यवले अपने आप को साफ छवि का बता रहे लेकिन काम ऐसे ऐसे कर रहे हैं कि विकास तो दिखा रहे ओं भी कागजों में जमीनी हकीकत कुछ भी नहीं इसी क्रम में आधी अधूरी रोड जैसे मामलों ने भी लोगों की चिंताओं को बढ़ाया है। आरोप है कि सड़क निर्माण के नाम पर राशि स्वीकृत कर खर्च भी दर्शा दिया गया, लेकिन मौके पर या तो कार्य अधूरा है या उसका कोई स्पष्ट अस्तित्व ही नहीं दिखता। इन घटनाओं ने एक समान पैटर्न की ओर इशारा किया है कागजों में विकास, जमीन पर अधूरा सच। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायतों में स्वीकृत योजनाओं की राशि का बड़ा हिस्सा खर्च दिखाकर निकाल लिया जाता है, जबकि वास्तविक कार्य या तो अधूरा रहता है या गुणवत्ता के मानकों पर खरा नहीं उतरता। कई लोगों का यह भी आरोप है कि उन्होंने संबंधित अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई। सूत्रों के अनुसार, सचिव रमेश यवले जहां-जहां पदस्थ रहे हैं, वहां इस प्रकार की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। बावजूद इसके, हर बार मामला या तो जांच के नाम पर लंबित रह जाता है या फिर फाइलों में सिमट जाता है। यही कारण है कि अब आम लोगों के बीच यह धारणा बनती जा रही है कि सचिव यवले पर कार्रवाई करना आसान नहीं है। लगातार उठते सवालों के बीच अब जिले के नए कलेक्टर से लोगों की उम्मीदें बढ़ी हुई है भ्रष्टाचार कर रहे सचिव रमेश यवले पर कार्रवाई होगी।ग्रामीणों, का मानना है कि यदि यवले की वर्तमान और पूर्व पदस्थापनाओं की निष्पक्ष व सही जांच कराई जाए, तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। विशेष रूप से निर्माण कार्यों, सड़क परियोजनाओं, पंचायत भवनों और अन्य योजनाओं की फील्ड जांच से सच्चाई स्पष्ट हो सकती है। इतना ही नहीं सचिव रमेश यवले जिस फर्म के बिल लगता है वह फर्म सिर्फ कागजों पर है वास्तव में जमीन पर आप को दिखाई नहीं देगी फिर भी धड़ल्ले से बिल पास हो जाते हैं!
