Betul News:स्थानांतरण के बाद भी नहीं थमा ‘सचिव का खेल’!

एक दिन बाद ही विवादास्पद भुगतान, टेमुरनी पंचायत में फर्जीवाड़े की बू

स्थानांतरण के बाद भी नहीं थमा ‘सचिव का खेल’!

एक दिन बाद ही विवादास्पद भुगतान, टेमुरनी पंचायत में फर्जीवाड़े की बू

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बैतूल :- ग्राम पंचायत टेमुरनी के सचिव रामदास पंडोले के स्थानांतरण के बाद भी उनका “खेल” थमने का नाम नहीं ले रहा। सचिव का स्थानांतरण आदेश 09 जून 2025 को जारी किया गया, जिसमें उन्हें टेमुरनी से खैरवाड़ा स्थानांतरित किया गया था। लेकिन हैरानी की बात यह है कि स्थानांतरण के सिर्फ एक दिन बाद, 10 जून 2025 को भी उन्होंने टेमुरनी पंचायत से एक संदेहास्पद भुगतान कर डाला, जिससे पंचायत में वित्तीय अनियमितताओं की आशंका गहराने लगी है।
कौन-सा आयोजन, किसके लिए हुई खरीद?
स्थानांतरण के बाद भी भुगतान की यह जल्दी कुछ सवाल खड़े करती है। भुगतान में तेल, मैदा, हल्दी, जीरा, काजू, किशमिश, बेसन और शक्कर जैसी वस्तुएं खरीदी गईं। लेकिन न तो ऐसा कोई आयोजन सार्वजनिक रूप से घोषित हुआ और न ही पंचायत रिकॉर्ड में इसकी स्पष्टता दिखाई गई।हमारे द्वारा भी किसी आयोजन के बारे में पड़ताल कि गई लेकिन हमें भी ग्राम पंचायत में किसी कार्यक्रम के बारे ग्रामीणों से कोई जानकारी प्राप्त नहीं हुई। ऐसे में यह संदेह और मजबूत हो गया है कि सचिव ने जाते-जाते फर्जी बिलों के जरिए वित्तीय लाभ लेने की कोशिश की।यह पहला मामला नहीं है जिसमें सचिव रामदास पंडोले का नाम विवादों में आया हो। पहले भी पंचायत में पांचवें वित्त आयोग की राशि में लाखों रुपये के गड़बड़ी की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। ब्याज की राशि, टेस्ट के नाम पर फर्जी भुगतान, और निर्माण कार्यों में लागत बढ़ाकर दर्शाने जैसी कई गतिविधियों में सचिव की भूमिका संदिग्ध रही है।रामदास पंडोले खुद को ईमानदार और सरल व्यक्तित्व के रूप में प्रस्तुत करते हैं, लेकिन उनकी कार्यशैली में पारदर्शिता का अभाव साफ नजर आता है। सचिव रहते हुए कई ऐसे भुगतान किए गए हैं, जिनकी कोई पुख्ता जानकारी या स्वीकृति नहीं मिलती। वे अक्सर अधिकारियों की कॉल भी नहीं उठाते, और आम लोगों के सवालों से भी बचते रहे हैं।जब इस पूरे मामले में सचिव रामदास पंडोले का पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो हमेशा की तरह उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की। यह कोई नई बात नहीं है – पंडोले पूर्व में भी पत्रकारों, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के कॉल अनदेखा करते रहे हैं। यह व्यवहार भी उनकी कार्यप्रणाली को संदेह के घेरे में डालता है।सचिव रामदास पंडोले का यह मामला स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था की कमजोरी को उजागर करता है। स्थानांतरण के बाद भी प्रभाव और नियंत्रण बनाए रखना, बिना आयोजन के भुगतान करना और जांच से बचना – यह सब दर्शाता है कि ग्राम पंचायत स्तर पर कैसे जिम्मेदार पदों पर बैठे व्यक्ति नियमों को ताक पर रखकर मनमानी करते हैं। अब देखना यह है कि जांच के बाद उन्हें संरक्षण मिलता है या वास्तविक कार्रवाई होती है।

इनका कहना
“संभव है कि धरती आभा शिविर के लिए सामग्री खरीदी गई हो, फिर भी मैं इस मामले की जांच करवा रहा हूं। यदि गलत तरीके से भुगतान किया गया है, तो संबंधित सचिव पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”

देवेंद्र दीक्षित मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत आठनेर

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