Illegal taxis: जिला मुख्यालय में अवैध टैक्सियों का बोलबाला!

जिला मुख्यालय में अवैध टैक्सियों का बोलबाला!

बैतूल।जिला मुख्यालय में सैकड़ों की संख्या में अवैध टैक्सिया खुलेआम संचालित हो रही हैं, जिनसे हर माह संचालकों द्वारा लाखों का व्यापार किया जा रहा है। सालों से चल रहे इन वाहनों पर न तो परमिट को लेकर कोई कार्रवाई हुई है और न ही प्रशासन ने कभी चेकिंग अभियान चलाया। स्थानीय अधिकारियों को भली-भाँति पता है कि लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम के पास प्राइवेट वाहन टैक्सी के रूप में खड़े रहते हैं। वही सूत्रों की मानें तो शहर में महाराष्ट्र और गुजरात पासिंग की गाड़ियां लाकर टैक्सी पर चलाई जा रही है। जो गाड़ियां महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में कंडम घोषित कर दी जाती है उसे जिले के अंदर लाकर बखूबी ए फर्राटे से सड़कों पर दौड़ाया जा रहा है। ना तो इन गाड़ियों के कागज पूरे होते है और नाही वाहन संचालक सही क्यों कि आरटीओ पास नहीं करता जिसकी वजह से यह गाड़ियां ट्रांसफर नहीं हो पाती है अगर  इ वाहनों से कोई दुर्घटना हो तो वाहन किसका ये पता नहीं चल पाता और अगर पुलिस रजिस्ट्रेशन नंबर से  वाहन मालिक का पता लगाती हैं तो वह दूसरे राज्य का होता है। बैतूल शहर में टैक्सियों का जाल फैला हुआ है, जिसके व्यवस्थित न होने से आम जनता को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। वैसे बैतूल प्रसंज्ञान लेकर इन सभी प्राइवेट टैक्सी संचालकों पर कारवाई करना चाहिए और सख्त हिदायत देने चाहिए कि गाड़ियों को टेक्सी परमिट कर चलाया जाए।

दुर्घटना में क्लेम से वंचित रहते हैं यात्री

निजी कोटे के चार पहिया वाहनों को किराए पर चलाने वाले चालकों को दुर्घटना की स्थिति में भारी नुकसान उठाना पड़ता है। बीमा कंपनियाँ इन वाहनों में सवार यात्रियों को क्लेम देने से इंकार कर देती हैं, क्योंकि ये वाहन अवैध रूप से टैक्सी के तौर पर चलाए जा रहे होते हैं। ऐसे में दुर्घटनाग्रस्त यात्रियों को क्लेम की राशि प्राप्त करने के लिए कोर्ट में लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ती है, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती है।

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