Betul News :बेजुबान पक्षियों को पानी के सकोरे रख दुआएं कमाए दुनिया में दुआओं से बड़ी कोई ताकत नहीं- ब्रह्माकुमारी रेखा दीदी
बेजुबान पक्षियों को पानी के सकोरे रख दुआएं कमाए दुनिया में दुआओं से बड़ी कोई ताकत नहीं- ब्रह्माकुमारी रेखा दीदी

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय चर्च वाली गली बरेठ रोड स्थित सेवा केंद्र द्वारा पक्षियों को पानी के सकोरे रखने की मुहिम चलाई गई जिसमें लोगों को प्रेरित करने के साथ-साथ सकोरे बांटें भी गए और स्वयं द्वारा पेड़ों पर सकोरे लगाकर लोगों को संदेश भी दिया गया जिससे लोग जागरुक होकर अपना ख्याल रखने के साथ-साथ बेजुबान पक्षियों का भी ऐसी गर्मी में ख्याल रखें और उनके लिए भी पीने के पानी की व्यवस्था करें। अपने कार्य में स्नेह, दया और करुणा जैसे गुणों से संपन्न होना भी जरूरी है। छोटे कार्यों से भी हम दुआएं कमा सकते हैं दुआओं के पात्र बन सकते हैं। दुआएं जीवन के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि हैं। जहां दुआएं हैं वहाँ हर कार्य सहज हो जाता है। दुआएं माँगने से नहीं मिलती। दुआएं कमानी पढ़ती हैं। निस्वार्थ सेवा भावना दुआओं का पात्र बनाती है। दुआओं से बड़ी कोई कमाई नहीं है। दुनिया में दुआओं से बड़ी कोई ताकत नहीं है। उक्त विचार ब्रह्माकुमारी रेखा दीदी ने रखें आगे दीदी ने कहा जब हम दूसरों को दोषी ठहराते हैं तो अपनी पॉवर को कम कर देते हैं। दुखी हम खुद के विचारों से ही होते हैं। स्वयं के विचारों के निर्माता हम स्वयं हैं। उन्होंने कहा कि दूसरों को दुआ देने से हमारी पॉवर बढ़ती है। जितनी पॉवर आती है, उतनी ही पॉजिटिविटी बढ़ती है। इसलिए अपनी स्थिति के लिए स्वयं को जिम्मेवार समझें। जितना हम स्वयं को जिम्मेवार समझते हैं, उतना ही हम स्वयं को परिवर्तन कर पाते हैं।ब्रह्माकुमारी रुक्मणी दीदी ने कहा कि समाज सेवक छोटा भगवान होता है. उसके अंदर संवेदना, करुणा, दया की भावना, उदारता, क्षमा भाव जैसे गुण होते हैं इन्हीं गुण के आधार पर वह असहाय और असमर्थों की सेवा करता है, कहां की सच्चे समाज सेवकों को भगवान की तरफ से बहुत दुआएं मिलती है. उन्होंने दुआओं को दुनिया का सबसे बड़ा खजाना बताया, कहा कि जीवन में हमें ऐसे कर्म नहीं करने चाहिए जिससे हमें बददुआएं मिलती हो, बददुआएं श्राप का काम करतीं हैं और दुआएं आशीर्वाद का काम करतीं हैं इसलिए जीवन में सोच-समझकर ही कार्य करें। रामस्वरूप भाई जी ने कहा कि काफी समय से वो ब्रह्माकुमारीज के सम्पर्क में हैं। जब भी वो बाहर कहीं जाते हैं तो सबसे पहले ब्रह्माकुमारीज सेवाकेंद्र पर जाते हैं। क्योंकि वहां जाने पर उन्हें एक अलौकिक वातावरण का अनुभव होता है। मन सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है। तन के स्वास्थ्य का तो हम ध्यान रखते हैं। लेकिन मन कैसे स्वस्थ बने उसका ज्ञान ब्रह्माकुमारीज के पास है। एक स्वस्थ मन ही खुशनुमा जीवन का माध्यम है। मन के स्वास्थ्य से ही परिवार स्वस्थ होता है और परिवार के स्वस्थ होने से राष्ट्र स्वस्थ बनता है।
