Betul News:मिश्रा के पेड पत्रकार अपनी डेड टांग अड़ा कर रेत माफियओ के लिए सत्ता धारी पार्टी को बचाने का कर रहे है प्रयास!!
मिश्रा के पेड पत्रकार अपनी डेड टांग अड़ा कर रेत माफियओ के लिए सत्ता धारी पार्टी को बचाने का कर रहे है प्रयास!!

बैतूल। वैसे तो हमारे देश का चैथा स्तंभ मानी जाने वाली पत्रकारिता आज ऐसे गर्त में गिरती जा रही है, जिससे प्रजातंत्र को एक तरह का खतरा पैदा हो गया है। प्रेस की स्वतंत्रता को बाहरी खतरों के बजाय अंदरूनी खतरों से बचाए जाने की जरूरत आन पड़ी है।समाचार पत्रों में धन के जोर पर समाचार छपवाने का काम जोरों पर चल पड़ा है। इस बीमारी से लगभग कोई भी समाचार पत्र अछूता नहीं है। ऐसे ही चंद अखबारों के पत्रकार जो पत्रकारिता को तारतार करते आ रहे है वैसे तो अपने आप को वरिष्ठ पत्रकार का तमका लेकर लोगों को बताते फिरते लेकिन वरिष्ठ जैसी कोई भी इन की सीरत दिखाई नहीं देती है खैरात में तो खुद लोगों से पैसा लेते हैं और अगर कोई ना दे तो ब्लैकमेलिंग जैसा काम भी चालू कर देते हैं वही हाल ही में रेत से भरे डंपर को वरिष्ठ अधिकारी द्वारा पकड़ा गया क्योंकि उसे वरिष्ठ अधिकारी को किसी जागरूक लोगों द्वारा सूचना दी गई कि किस तरह से रेत का अवैध परिवहन हो रहा है उसमें किसी का कोई उल्लेख नहीं किया गया लेकिन एक डेड टांग जो कि हमेशा कहीं ना कहीं अड़ता है अपनी ऐसी हरकतों के चलते उसे दरकिनार किया जाता है लेकिन अपने आप को सबके बीच में रखने का दिखावा भी वह बखुबी करता है! अगर रंग बदलने की बारी आए तो वह रंग बदलें में गिरगिट को भी मात दे सकता है जिसका घर खैरात की वजह से चल रहा है वह लोगों को खैरात के नुकसान और फायदे बता रहा है यह सबसे पहले खैरात लेने के लिए हमेशा आगे रहता है लेकिन फिर भी न जाने सत्ता पार्टी के कुछ छुट भैया नेता के चलते किसी को बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ना जिससे यह कहा जा सकता है कि मिश्रा के पेट पत्रकार अपनी डेड टांग अड़ा कर रेत माफिया के लिए सत्ताधारी पार्टी को बचाने का कर रहे प्रयास जबकि सबको पता है कि कौन सी पार्टी के नेता रेत के कारोबार में लिप्त है लेकिन कुछ चंद पेट पत्रकारों के चलते जनता तक वास्तविकता पहुंचने की बजाय उस खैरात के लिफाफे जिसके वजन के आगे नतमस्तक होकर अपनी कलम का समझौता कर लेते हैं। अगर कोई समाज से भी या फिर किसी पार्टी के व्यक्ति को अगर घटना के वक्त देख लिया जाता है तो यह उसका फायदा उठाकर उनके खिलाफ लिख कर लिफाफे का जुगाड़ करने में लग जाते हैं! अगर कोई इनके का नाम उजागर कर भी दे तो उसे अपनी वरिष्ठता की बदौलत दबाने का भरपूर प्रयास किया जाता है!
