Police News:मोहदा थाना प्रभारी पर ₹60,000 रिश्वत लेने का आरोप: दुराचार के आरोपी को जेल ना भेजने का वादा कर, फिर भी भेजा जेल!
पीड़ित परिवार ने एसपी ऑफिस में न्याय की गुहार लगाई
मोहदा थाना प्रभारी पर ₹60,000 रिश्वत लेने का आरोप: दुराचार के आरोपी को जेल ना भेजने का वादा कर, फिर भी भेजा जेल,
पीड़ित परिवार ने एसपी ऑफिस में न्याय की गुहार लगाई

बैतूल समाज में कानून व्यवस्था को बनाए रखने और अपराध पर नियंत्रण रखने के उद्देश्य से पुलिस की भूमिका हमेशा से अहम रही है। बोरदेही थाना प्रभारी 50000 लेने का स्क्रीनशॉट वायरल हुआ था वह मामला अभी थमा नहीं की मोहदा थाना प्रभारी पर 60000 लेने का आरोप लगा है बैतूल जिले के मोहदा थाना से जुड़ा एक मामला पुलिस विभाग की छवि को धूमिल करता नज़र आ रहा है। भ्रष्टाचार के इस गंभीर मामले में थाना प्रभारी पर बलात्कार (धारा 376) के आरोपी को जेल ना भेजने के बदले में ₹60,000 रिश्वत लेने का आरोप लगाया गया है।
घटना का विवरण
मोहदा थाने के प्रभारी पर आरोप है कि उन्होंने 376 के आरोपी से कथित तौर पर कहा कि अगर ₹60,000 दिए जाएं, तो उसे जेल नहीं भेजा जाएगा। इस आश्वासन के आधार पर आरोपी के परिजनों ने पुलिस अधिकारी को मांगी गई राशि दे दी। परंतु रिश्वत की रकम लेने के बावजूद, आरोपी को तीन चार दिन बाद मेरे पुत्र पवन को जेल भेज दिया गया, मेरे द्वारा दिए गए पैसे वापस मांगने की बात कही तो थाना प्रभारी नेपाल सिंह द्वारा कहा गया कि हमसे जितना बन कर दिया तेरा पैसा वापस नहीं करेंगे तो उसे जो बन कर लो या गंभीर आरोप परिजनों ने थाना प्रभारी के ऊपर लगे जिससे उसके परिवार को गहरा धक्का लगा।
पीड़ित की एसपी ऑफिस में गुहार
जब आरोपी के परिजन यह देखकर हताश हुए कि पुलिस ने वादा तोड़ दिया है, तो उन्होंने न्याय की उम्मीद में एसपी ऑफिस का दरवाजा खटखटाया। पीड़ित के पिता ने एसपी से मुलाकात कर थाना प्रभारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि न केवल उनसे ₹60,000 की अवैध वसूली की गई, बल्कि उनके बेटे को जेल भी भेज दिया गया, जो सरासर अन्याय है।
परिवार की मांग
पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्हें न्याय दिया जाए और उन पैसों को वापस किया जाए जो रिश्वत के रूप में दिए गए थे। उन्होंने यह भी मांग की है कि भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
पुलिस विभाग पर सवाल
इस घटना ने पुलिस विभाग के अंदरूनी भ्रष्टाचार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर, जहां पुलिस को समाज में कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, वहीं दूसरी ओर, ऐसे भ्रष्टाचार के मामले पुलिस पर आम जनता के भरोसे को कमजोर करते हैं। अब देखना यह होगा कि पीड़ित परिवार की शिकायत पर एसपी और उच्च अधिकारी क्या कार्रवाई करते हैं और दोषियों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाते हैं।
निष्कर्ष
यह मामला पुलिस विभाग में फैले भ्रष्टाचार का एक और उदाहरण है, जहां न्याय को पैसे के बदले में बेचा जा रहा है। पीड़ित परिवार की उम्मीदें अब एसपी ऑफिस पर टिकी हैं, जो इस मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषी अधिकारी को दंडित करने का कार्य करेगा।
