Police News:1904 का थाना और 2026 की पुलिस! चिचोली में खंडहर के भरोसे कानून व्यवस्था
टूटे दरवाजे, झड़ती दीवारें और जान जोखिम में डालकर ड्यूटी… आखिर हादसे का इंतजार क्यों?
1904 का थाना और 2026 की पुलिस! चिचोली में खंडहर के भरोसे कानून व्यवस्था
टूटे दरवाजे, झड़ती दीवारें और जान जोखिम में डालकर ड्यूटी… आखिर हादसे का इंतजार क्यों?

बैतूल जिले का चिचोली थाना इन दिनों अपनी बदहाली को लेकर चर्चा में है। आधुनिक दौर में जहां सरकारी भवन हाईटेक और सुविधायुक्त बनाए जा रहे हैं, वहीं चिचोली थाना आज भी 1904 में बनी जर्जर इमारत के सहारे चल रहा है। हालत ऐसी है कि थाना कम और खंडहर ज्यादा नजर आता है, लेकिन इसी भवन में पुलिसकर्मी दिन-रात ड्यूटी करने को मजबूर हैं थाने के टूटे दरवाजे, उखड़ता प्लास्टर, दरारों से भरी दीवारें और कमजोर छतें हर दिन खतरे की कहानी बयां करती हैं। बारिश आते ही भवन की हालत और भयावह हो जाती हैं। ऐसा लगता है मानो पूरा सिस्टम किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा हो। सवाल यह है कि अगर भवन कभी भरभराकर गिर गया, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?विडंबना यह भी है कि कानून व्यवस्था संभालने वाली पुलिस खुद असुरक्षित माहौल में काम कर रही है। एक तरफ अपराध नियंत्रण की जिम्मेदारी, दूसरी तरफ सिर पर जर्जर छत का डर। लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की नजर शायद अब तक इस थाने तक पहुंची ही नहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि जिले में कई जगह नए और आधुनिक थाना भवन बन चुके हैं, लेकिन चिचोली थाना अब भी उपेक्षा का शिकार बना हुआ है। लोगों ने मांग की है कि जल्द नया थाना भवन स्वीकृत कर निर्माण कराया जाए, ताकि पुलिसकर्मियों और आम जनता दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
सवाल सिर्फ भवन का नहीं… सिस्टम की सोच का भी है जब पुलिस ही सुरक्षित नहीं, तो सुरक्षा व्यवस्था के दावों पर भरोसा कैसे किया जाए?
