Police News:सांसद, विधायकों को पुलिस करेगी सैल्यूट आदेश क्या लोकतंत्र पर हमला नहीं आखिर वर्दी का अपमान क्यों!
सांसद, विधायकों को पुलिस करेगी सैल्यूट आदेश क्या लोकतंत्र पर हमला नहीं आखिर वर्दी का अपमान क्यों!

एमपी के डीजीपी कैलाश मकवाना ने कुछ दिन पहले एक आदेश जारी किया जिसमें पुलिस अफसरों और कर्मचारियों को सांसदों और विधायकों को सैल्यूट करने के लिए कहा गया है।लेकिन क्या पुलिस अधिकारियों को सांसदों और विधायकों को अनिवार्य रूप से सलामी देने संबंधी आदेश को “लोकतंत्र पर हमला और वर्दी का अपमान नहीं है।जिस समय राज्य की कानून व्यवस्था रसातल यानी यू कह सकते है कि पुराणों के अनुसार पृथ्वी के नीचे के सात लोकों में से छठा लोक है, जहाँ दैत्य, दानव और पणि नाम के असुर इंद्र के डर से निवास करते हैं तो वही पुलिस जमीन पर रह रहे इंद्र से नहीं राजनीतिक दानव से छुपने जैसी हालत हो गई है!पुलिस खुद अपराधियों के निशाने पर हो, ऐसे समय में राज्य सरकार पुलिस को न्याय दिलाने की बजाय सत्ता के प्रतीकों के सामने झुकने का फरमान सुना रही है। यह आदेश जनतंत्र के बुनियादी सिद्धांतों और संविधान की आत्मा ‘जनता सर्वोच्च है’ का भी अपमान है। जहा प्रदेशभर में रेत, शराब, भू-माफिया और ट्रांसपोर्ट सिंडिकेट खुलेआम पुलिस को चुनौती दे रहे हैं। पिछले कुछ लगभग 6 महीने में पुलिस पर हमलों की दर्जनों घटनाएं, थानों पर हमले, जवानों को पीटना, राजनीतिक संरक्षण में अपराधियों को बचाना, लगातार हो रही ऐसी अनेक घटनाओं ने पुलिस की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या इस आदेश से पुलिस का मनोबल कही ना कही कमजोर नहीं होगा!वह एक ओर अपराधियों से लड़ रही है, तो दूसरी तरफ भाजपा नेताओं के दबाव से! अब यह आदेश उन्हें और भी कमजोर, झुका हुआ और भयभीत बना सकता है। पुलिस की निडर और निष्पक्ष कार्यप्रणाली में सत्ता दल के नेताओं का दखल बढ़ सकता है!
आम जनता का सरकार से सवाल
1. पुलिस की प्राथमिकता अपराध रोकना है या नेताओं को सलाम ठोकना? जब किसी मामले में विधायक थाने आकर दबाव बनाएंगे और पहले सलामी लेंगे, तब पुलिस स्वतंत्र जांच कैसे करेगी?
2. क्या लॉ एंड ऑर्डर की स्थितियों में नेतागिरी के लिए पहुंचने वाले सांसदों को सैल्यूट देने के लिए पुलिस को ट्रेनिंग दी जाएगी? जब कानून व्यवस्था को नियंत्रित करने की स्थिति बनेगी, तब क्या पुलिस जनता को संभालेगी या नेताओं को सम्मान देगी?
3. पब्लिक डोमेन में आने वाली खबरें बताती हैं कि माफिया सत्ताधारी नेताओं के संरक्षण में ही गैर-कानूनी कार्य करते हैं! सरकार के इस निर्णय से क्या उनके हौसले बुलंद नहीं होंगे?
