Political Analysis:राजनैतिक विश्लेषण बैतूल में नहीं बनी बात तो बबला मुल्ताई में अपनी ज़मीन तलाश रहे!
राजनैतिक विश्लेषण बैतूल में नहीं बनी बात तो बबला मुल्ताई में अपनी ज़मीन तलाश रहे!

बैतूल: बैतूल हों या अन्य शहर हर जगह धर्म का डंका बज रहा है, लेकिन धर्म के नाम पर राजनीति की सीढ़ी चढ़ना ज्यादा अधिक आसान हों गया है। बैतूल जिले के नेता धार्मिक भावनाओं को आधार बना कर धार्मिक यात्राएं निकाल रहे है। यह यात्रा भाजपा के ही नही कांग्रेस के नेता भी निकाले में पीछे नहीं है। तो वही इन नेताओं को बैतूल में विकास से कोई मतलब नहीं यह सिर्फ अपने राजनीतिक चमकाने के लिए युवा पीढ़ी को बर्बाद कर रहे हैं हालाकि इस यात्रा का पूर्व में बहुत लाभ मिला है। लेकिन जिस प्रकार से बैतूल जिले में भक्तों की धार्मिक भावनाओं के साथ खेला जा रहा है। यह बिल्कुल गलत है। नेता सिर्फ़ धार्मिक रूप से चंदा देकर और लोगों को ढोल मंजीरे बाट कर अपना वोट संग्रह करने में लगे हुए थे। विशेष सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक और एक राजनीतिक विश्लेषण करता ने हमें बताया कि भाजपा के जिला अध्यक्ष बबला अब बैतूल को छोड़ मुलताई में अपनी जमीन तलाश रहे हैं क्योंकि उनको समझ में आ गया है कि बैतूल में तो अपनी बात नहीं बनेगी।क्योंकि जब तक भैया है भैया ही रहेंगे। इसलिए वह अब अपनी जमीन मुलताई में तलाश रहे हैं। भैसदेही और घोड़ा डोंगरी और आमला उनके बस की बात नहीं क्योंकि वह जनरल वर्ग से आते हैं । इसलिए उन्हें यही समझ में आया कि क्यों ना मुलताई में ही अपनी जमीन बनाई जाए। हम इस खबर से किसी के धार्मिक भावनाएं हाथ नहीं करना चाहते लेकिन जिस प्रकार से धर्म के नाम पर लोगों को इकट्ठा करके वोट की राजनीति की जा रही है उसे जिले का विकास होना तो असंभव ही साबित हो रहा है। एक राजनीतिक विश्लेषण करता ने हमें यह भी बताया कि विगत चुनाव से पहले हर पंडाल और हर समिति को लाखों रुपए का चंदा और ढोलक मंजीरे बाटी गई जिसमें जो जितना अधिक चंदा दिया समिति के कार्यकर्ता उनकी तरफ हो लिए जिस राजनीतिक और भी गिर गईं। लेकिन इन लोगों की वजह से बैतूल के विकास पर अब बहुत बड़ा प्रश्न चिन्ह बन गया है। हालांकि सूत्रों से मिली जानकारी जब से जिला अध्यक्ष बबला बने हैं तब से सबसे ज्यादा कर्मठ कार्यकर्ताओं द्वारा इस्तीफे दिए हैं!
