Betul News: कानून के रखवाले या सौदेबाज़? जब गिरफ़्तार न करने की कीमत तय हुई!
जनचर्चा विशेष: कानून के रखवाले या सौदेबाज़? जब गिरफ़्तार न करने की कीमत तय हुई!

बैतूल।कभी कहा जाता था कि “कानून सबके लिए बराबर है,पर अब लगता है बराबरी भी अब पैसे के हिसाब से तय होती है!सूत्रों से मिल रही पक्की जानकारी के मुताबिक़,खाकी वाले विभाग के एक बड़े साहब ने हाल ही में एक आरोपी से गिरफ़्तार न करने की कीमत वसूली। और उसके बावजूद गिरफ्तार कर जेल भेज दिया यानी पहले पैसे लो, फिर गिरफ्तार करो!इतना ही नहीं दो अन्य लोगों को न पकड़ने के लिए पाँच लाख रुपए की डिमांड तक की जा चुकी है।कहते हैं, पहले इंसाफ़ अदालत में मिलता था,अब थाने में डील तय होने के बाद!किसी के लिए गिरफ़्तारी टालने की फीस लाखों में,तो किसी के लिए “नाम हटाने की सेवा अलग से!ये सब अब किसी अफ़वाह की तरह नहीं, बल्कि ‘अंदरखाने की रेट लिस्ट’ की तरह घूम रही हक़ीक़त है। वही ये वो लोग हैं जिन्होंने शहर के सबसे बड़े कॉलेज में करोड़ो की राशि गमन की है।जिन बच्चों का हक़ किसी फ़ाइल, खाते और कमीशन में दबा दिया गया।कितनी विडंबना है जो खा गया, वो आज़ाद घूम रहा है,
