Betul News:जनसुनवाई या जन-परेशानी? घंटों खड़े रहकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं ग्रामीण

दूर-दराज से आने वाले आवेदकों के लिए नहीं पर्याप्त बैठने की व्यवस्था, शिकायत लेकर पहुंचने वालों को झेलनी पड़ रही दोहरी परेशानी

जनसुनवाई या जन-परेशानी? घंटों खड़े रहकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं ग्रामीण

दूर-दराज से आने वाले आवेदकों के लिए नहीं पर्याप्त बैठने की व्यवस्था, शिकायत लेकर पहुंचने वालों को झेलनी पड़ रही दोहरी परेशानी

बैतूल। जिले में प्रत्येक मंगलवार को आयोजित होने वाली जनसुनवाई का उद्देश्य आम लोगों की समस्याओं को सुनकर उनका निराकरण करना है, लेकिन जनसुनवाई में पहुंचने वाले ग्रामीणों की स्थिति कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। दूर-दराज के गांवों से अपनी शिकायत और समस्याएं लेकर आने वाले लोगों को घंटों तक खड़े रहकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है।ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारी वातानुकूलित कमरों में बैठकर शिकायतें सुनते हैं, लेकिन बाहर लंबी कतारों में खड़े लोगों की परेशानियों पर किसी का ध्यान नहीं जाता। बुजुर्ग, महिलाएं और दिव्यांगजन भी कई बार घंटों तक खड़े रहने को मजबूर होते हैं। जनसुनवाई स्थल पर पर्याप्त बैठने की व्यवस्था नहीं होने से लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।जनसुनवाई से जुड़ी तस्वीरें भी व्यवस्था की हकीकत बयां करती नजर आती हैं। पहली तस्वीर में बुजुर्ग आवेदक घंटों इंतजार के बाद थक-हारकर फर्श पर बैठे दिखाई दे रहे हैं। दूसरी तस्वीर में लोग गेट के पास अपनी बारी आने का इंतजार करते खड़े हैं। तीसरी तस्वीर में बड़ी संख्या में आवेदक एक साथ इस तरह खड़े दिखाई देते हैं मानो किसी व्यवस्था के बजाय भीड़ प्रबंधन का दृश्य हो। वहीं चौथी और अंतिम तस्वीर में कई बेबस और लाचार लोग उम्मीद भरी निगाहों से अपनी बारी का इंतजार करते नजर आते हैं कि शायद आज कलेक्टर उनकी समस्या सुनेंगे और उसके समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम उठेगा।आवेदकों का कहना है कि सुबह से लेकर दोपहर तक अपनी बारी का इंतजार करने के बाद भी कई मामलों में समस्या का समाधान नहीं हो पाता। ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि शिकायतों का समय पर निराकरण नहीं होना है और बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं, तो फिर जनसुनवाई में आने का क्या लाभ? अनोखा सच न्यूज पोर्टल इस खबर के माध्यम से प्रशासन से मांग की है कि जनसुनवाई में आने वाले नागरिकों के लिए पर्याप्त कुर्सियों, अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की जाए, ताकि अपनी समस्या लेकर आने वाले लोगों को कम से कम सम्मानजनक वातावरण मिल सके।जनसुनवाई का उद्देश्य जनता और प्रशासन के बीच संवाद स्थापित करना है, लेकिन यदि शिकायतकर्ता को अपनी बात कहने से पहले ही घंटों खड़े रहने की परीक्षा देनी पड़े, तो व्यवस्था की संवेदनशीलता पर सवाल उठना लाजिमी है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस समस्या पर ध्यान देता है या फिर हर मंगलवार लोगों को इसी तरह अपनी बारी के इंतजार में खड़े रहना पड़ेगा।

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