नाबालिग बालिकाओं के लिए आत्मरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम: सुरक्षा और सशक्तिकरण की दिशा में कदम
बैतूल में सेल्फ डिफेंस प्रशिक्षण: बालिकाओं की सुरक्षा के लिए विशेष पहल
नाबालिग बालिकाओं के लिए आत्मरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम: सुरक्षा और सशक्तिकरण की दिशा में कदम
बैतूल में सेल्फ डिफेंस प्रशिक्षण: बालिकाओं की सुरक्षा के लिए विशेष पहल

बैतूल पुलिस अधीक्षक निश्चल झारिया, ने नाबालिग बालिकाओं और महिलाओं की सुरक्षा को मजबूत करने और उन्हें भयमुक्त वातावरण देने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। बालिकाओं के विरुद्ध बढ़ते अपराधों को रोकने के लिए, जिले की मुख्य कन्या शालाओं में 3 अक्टूबर से 9 अक्टूबर तक विशेष सेल्फ डिफेंस प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। इसका उद्देश्य बालिकाओं में आत्मविश्वास बढ़ाना और उन्हें असामाजिक तत्वों से अपनी सुरक्षा करने के लिए सक्षम बनाना है।
प्रशिक्षण का उद्देश्य और कार्यक्रम का विवरण

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम, विशेष प्रशिक्षकों द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों की बालिकाओं और स्कूल की छात्राओं को आत्मरक्षा के विभिन्न तरीकों में प्रशिक्षित करने के लिए आयोजित किया गया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य बालिकाओं में आत्मरक्षा की भावना विकसित करना और उनकी सुरक्षा को सुनिश्चित करना है। पुलिस अधीक्षक श्री निश्चल झारिया का कहना है कि यह पहल महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, और इससे महिलाओं और बच्चों के प्रति होने वाले अपराधों में कमी लाने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रमुख अधिकारियों की भागीदारी
इस प्रशिक्षण शिविर में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कमला जोशी, अनुविभागीय अधिकारी पुलिस शालिनी परस्ते, महिला थाना और महिला सेल प्रभारी, तथा अन्य पुलिस अधिकारी भी सक्रिय रूप से शामिल हुए हैं। इससे पूर्व, सीएम राइज स्कूल भैंसदही में भी बालिकाओं को जागरूक करने का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास अधिकारी श्री गौतम अधिकारी ने भी मार्शल आर्ट और सेल्फ डिफेंस का प्रशिक्षण दिलाने पर जोर दिया था, जिसके बाद अब जिले की सभी बालिकाओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है।
पुलिस अधीक्षक निश्चल झारिया ने बालिकाओं को सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए निम्नलिखित निर्देश दिए:
1. सुरक्षा उपाय: हमेशा सतर्क रहें और अनजान लोगों से दूरी बनाए रखें।
2. आत्मविश्वास: आत्मसम्मान बनाए रखने के लिए आत्मविश्वास बढ़ाएं।
3. शिक्षा और जागरूकता: अपने अधिकारों और सुरक्षा के बारे में जागरूक रहें।
4. सामाजिक समर्थन: परिवार और समाज से ग़लत कार्यों के प्रतिरोध का समर्थन प्राप्त करें।
5. मानसिक स्वास्थ्य: तनाव से निपटने के स्वस्थ तरीके अपनाएं।
6. आपातकालीन स्थिति: पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों से संपर्क करने में संकोच न करें।
7. स्वास्थ्य और पोषण: शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए सही आहार और व्यायाम करें।
8. आत्मरक्षा: आत्मरक्षा के तरीके सीखें और तैयार रहें।
महिला बाल विकास अधिकारी के माध्यम से प्रशिक्षण का संचालन इस शिविर का संचालन महिला बाल विकास अधिकारी द्वारा उपलब्ध कराए गए प्रशिक्षकों द्वारा किया जा रहा है, ताकि बालिकाएं आत्मरक्षा के कौशल में सक्षम हो सकें और अपनी सुरक्षा को मजबूत बना सकें।
