Betul News:कागजों में दुकान, जमीन पर गायब बिलों का खेल और सचिव यवले का मैनेजमेंट

कागजों में दुकान, जमीन पर गायब बिलों का खेल और सचिव यवले का मैनेजमेंट!


बैतूल।जिले में सरकारी सिस्टम की एक और ‘कमाल’ कहानी सामने आई है—जहां दुकान सिर्फ कागजों में चल रही है, लेकिन उसके बिल पूरे सम्मान के साथ पास भी हो रहे हैं। जमीन पर दुकान ढूंढने निकलो तो कुछ नहीं मिलता, लेकिन फाइलों में उसका कारोबार जमकर दौड़ रहा है।ग्रामीणों का आरोप है कि यह कोई साधारण गड़बड़ी नहीं, बल्कि पूरी सेटिंग का मामला है। संबंधित सचिव की भूमिका पर भी उंगलियां उठ रही हैं, जिन पर इस ‘अदृश्य दुकान’ को जीवित रखने का आरोप लगाया जा रहा है। सवाल यह है कि जब दुकान है ही नहीं, तो आखिर बिल किस बात के और भुगतान किस आधार पर? अगर बात करें अधिकाश पंचायतों में यही हाल है सचिव की मनमानी सूत्रों से मिली जानकारी में सचिव इन दुकान दुकानदारों से सेटिंग कर लेते हैं और कुछ कमीशन के चक्कर में जीएसटी बिल भी उपलब हो जाता है क्यों कि काम तो होता नहीं है इस लिय बिल देने के बाद शासकीय राशि की बंदरबांट कर लेते हैं इस लिए तो बोला जा रहा है कि शायद यह जिले की पहली अदृश्य दुकान है, जो बिना अस्तित्व के भी सरकारी खजाने से कमाई कर रही है। हैरानी की बात यह है कि रिकॉर्ड में सिर्फ इसी दुकान के बिल नजर आते हैं, बाकी दुकानदार जैसे इस सिस्टम में मौजूद ही नहीं। इतना ही नहीं ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम पंचायत कुन्हखेड़ी के सचिव रमेश यवले द्वारा अपनी मनमर्जी से कार्य किए जा रहे हैं। विकास कार्यों में अनियमितता बरती जा रही है और कई निर्माण कार्य अधूरे छोड़ दिए गए हैं। इतना ही नहीं, आम नागरिकों के साथ दुर्व्यवहार करने के भी आरोप लगाए गए हैं, जिससे गांव में असंतोष का माहौल बना हुआ है।ग्रामीणों ने यह भी बताया कि पंचायत स्तर पर मजदूरी और शासन की योजनाओं को लेकर पारदर्शिता नहीं रखी जा रही है। लोगों को योजनाओं की सही जानकारी नहीं मिल पा रही, जिससे वे मूलभूत सुविधाओं से वंचित हो रहे हैं।

अगला अंक पढ़ना ना भूलना बहुत जल्द भ्रष्टाचार करने वाले सचिव की पूरी कुंडली अनोखा सच न्यूज पोर्टल पर देखने को मिलेगी!

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