encroached: पूंजीपतियों पर मेहरबान जिला प्रशासन लोकनिर्माण विभाग की जमीन पर सालो से अतिक्रमण, जिम्मेदार मौन
पूंजीपतियों पर मेहरबान जिला प्रशासन लोकनिर्माण विभाग की जमीन पर सालो से अतिक्रमण, जिम्मेदार मौन

रसूखदारों पर प्रशासन किस कदर मेहरबान है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि, प्रशासन गरीबों के अतिक्रमण तो सख्ती के साथ हटा देता है। लेकिन उन रसूखदारों के सामने नतमस्तक हो जाता है जिनकी सत्ता में तूती बोलती है। मामला है कारगिल चौक का जहां सरकारी वाहनों को ठेके पर लेने वाले एक ठेकेदार ने लोकनिर्माण विभाग की जमीन पर अतिक्रमण कर रखा है। सरकारी जमीन का निजी उपयोग पिछले लंबे समय से किया जा रहा है लेकिन ना ही प्रशासन ने इस पर ध्यान दिया है और न ही लोकनिर्माण विभाग ने लिहाजा इस जमीन पर अतिक्रमण कर यह लोहे की बनी दूकान में ऑफिस संचालन के साथ साथ स्कूल बसें, एम्बुलेंस सहित अन्य वाहन खड़े किए जा रहे हैं।
सड़क के किनारे का अतिक्रमण नजर अंदाज
प्राप्त जानकारी के मुताबिक यह अतिक्रमण सरकारी महकमों में वाहन ठेके पर लेने वाले ठेकेदार द्वारा किया गया है। कारगिल चौक पर पीआईयू कार्यालय के ठीक बगल की जमीन पर बड़े पैमाने पर एम्बुलेंस, सीएम राइज स्कूल में चलाई जाने वाली बसें और अन्य वाहन खड़े आसानी से देखे जा सकते हैं। जबकि इस जमीन का उपयोग किये जाने के लिए इस ठेकेदार ने कोई अनुमति नहीं ली है। बताया जा रहा है कि सरकारी अस्पताल में चलाई जाने वाली एम्बुलेंसों का ठेका भी पिछले लंबे समय से इस ठेकेदार द्वारा चलाया जा रहा है। अन्य सरकारी कार्यालयों में भी वाहन किराए पर दिए गए हैं। जिसकी वजह से सरकारी अधिकारियों ने भी ठेकेदार को खुली छूट दे रखी है। और उसके खिलाफन ही कोई कार्यवाही की जाती है और न ही जमीन से अतिक्रमण हटाये जाने के लिए उसे अभी तक कोई नोटिस तक जारी किया गया है। जिससे ठेकेदार के हौसले बुलंद हैं। और सरकारी जमीन का एक बड़ा हिस्सा वाहन खड़े किए जाने के लिए उपयोग किया जा रहा है।
तुरन्त छीन ली जाती है गरीबो की रोजी रोटी
इस मामले को लेकर सबसे ज्यादा नाराजगी उन गरीबों में देखी जा रही है जो सड़क किनारे अपनी छोटी छोटी दुकाने लगाकर प्रतिदिन बमुश्किल 200, 300 रुपये कमा पाते हैं। ऐसे ही कुछ दुकानदारों ने बताया कि समय समय पर हमेशा अतिक्रमण बताकर नगर पालिका, राजस्व विभाग और लोक निर्माण विभाग हमारी दुकाने हटा देता है। वहीं एक लंबे अंतराल से वाहन सप्लाई करने वाला ठेकेदार सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर इस जमीन का उपयोग अपने और अधिकारियों को यह सरकारी कब्जा नजर वाहन खड़े करने के लिए कर रहा है। क्या प्रशासन नहीं आ रहा। जबकि इसी जमीन के ठीक बाजू में कई सरकारी विभागों के अधिकारी निवास कर रहे हैं। दिनभर इस सड़क से सरकारी अधिकारियों का आना जाना लगा रहता है। प्रशासन और जनप्रतिनिधि यदि वास्तव में अपने आप को गरीबों का हितैसी कहते है तो तत्काल संज्ञान लेकर यह अतिक्रमण सरकारी जमीन से कब्जा हटाया जाना चाहिए।
