Betul News: मेडिकल कॉलेज का भूमि पूजन कल, जवाब बाद में? बैतूल मेडिकल कॉलेज के नाम पर शर्तें क्या हैं, कीमत कौन चुकाएगा?
मेडिकल कॉलेज का भूमि पूजन कल, जवाब बाद में? बैतूल मेडिकल कॉलेज के नाम पर शर्तें क्या हैं, कीमत कौन चुकाएगा?

बैतूल जिले को मिलने जा रही बहुप्रतीक्षित मेडिकल कॉलेज की सौगात को लेकर जश्न का माहौल है। मंच सज चुके हैं, उद्घाटन की तैयारियाँ पूरी हैं और बड़े नेताओं के दौरे की घोषणा हो चुकी है। लेकिन इस चमक-दमक के बीच जनता का पीपीपी मॉडल, इलाज की वास्तविक लागत, सरकारी नियंत्रण और आम आदमी को मिलने वाले लाभ पर सवाल भी उतनी ही तेज़ी से खड़े हो रहे हैं। आधारशिला कार्यक्रम में राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और मुख्य मंत्री मोहन यादव की मौजूदगी प्रस्तावित है।भाजपा प्रदेश अध्यक्ष व बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल ने पत्रकारों से चर्चा में इसे आदिवासी बहुल जिले के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उनका दावा है कि मेडिकल कॉलेज खुलने से जटिल बीमारियों का इलाज बैतूल में ही, आधुनिक तकनीक और किफायती दरों पर संभव होगा और मरीजों को अब नागपुर व भोपाल की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। लेकिन ज़मीनी सवाल यह है कि घोषणाओं और हकीकत के बीच की दूरी कितनी होग इतना ही नहीं पत्रकार वार्ता में बैतूल विधायक हेमन्त खंडेलवाल के अनुसार मेडिकल कॉलेज पीपीपी सरकार द्वारा 25 एकड़ भूमि लीज पर 75% बिस्तरों पर इलाज पूरी तरह निःशुल्क 25% बिस्तरों पर शुल्क मध्यम वर्ग व गैर-आयकरदाताओं को रियायती दरें आयकरदाताओं को CGHS पैकेज रेट पर इलाज लेकिन सवाल यह है कि पीपीपी को सिर्फ प्राइवेट नहीं कहा जा रहा, लेकिन शुल्क समिति कौन बनाएगा? निजी प्रबंधन पर सरकारी नियंत्रण कितना होगा?नियम तोड़ने पर कार्रवाई किस स्तर पर होगी?इन सवालों पर अभी तक कोई सार्वजनिक दस्तावेज़ सामने नहीं आया। नेताओं का दावा है कि मेडिकल कॉलेज तीन साल में बनकर तैयार हो जाएगा। पर जनता जानना चाहती है कि निर्माण की स्पष्ट टाइमलाइन क्या है ठेकेदारों की जवाबदेही किसके पास होगी? देरी हुई तो जुर्माना और कार्रवाई कहाँ दर्ज है? आमला विधायक योगेश पंडाग्रे ने मेडिकल कॉलेज को रोज़गार का मील का पत्थर बताया डॉक्टर, नर्स, पैरामेडिकल व सहायक स्टाफ की नियुक्ति रियल एस्टेट, होटल, खानपान और स्थानीय व्यापार को बढ़ावा बैतूल को चिकित्सा व अनुसंधान केंद्र बनाने का दावा स्थानीय युवाओं के लिए आरक्षण, प्राथमिकता और प्रशिक्षण पर कोई ठोस नीति, कोई समय सीमा, कोई अधिसूचना नहीं। 75% निःशुल्क इलाज की कानूनी गारंटी कहाँ है? 25% भुगतान वाले बेड की दरें कौन तय करेगा?निजी डॉक्टरों की सेवाओं पर सरकारी निगरानी कैसे होगा!गरीब व आदिवासी मरीज रेफरल के नाम पर बाहर तो नहीं भेजे जाएंगे? मेडिकल कॉलेज बैतूल के लिए उम्मीदों का अस्पताल बन सकता है बशर्ते वादे काग़ज़ से उतरकर वार्ड तक पहुँचें।कल की आधारशिला केवल इमारत की नहीं,जनता के भरोसे की भी परीक्षा होगी।
