Betul News:शराब दुकान तो हटेगा नहीं, आंगनबाड़ी केंद्र को कही और शिफ्ट कर दे प्रशासन!
शराब दुकान तो हटेगा नहीं, आंगनबाड़ी केंद्र को कही और शिफ्ट कर दे प्रशासन!

बैतूल। शहर की शराब दुकान हटाने के आदेश तो हो गए लेकिन रसूख शराब ठेकेदार को उस आदेश से कोई भी फर्क नहीं पड़ रहा इस लिए तो राजेंद्र वार्ड की आंगनवाड़ी केंद्र के पास की शराब दुकान नहीं हटी।राजेंद्र वार्ड में आंगनबाड़ी केंद्र के ठीक बगल में एक शराब दुकान लंबे समय से संचालित हो रही है। इस दुकान के आसपास दिनभर शराबियों का जमावड़ा रहता है, जिससे बच्चों और महिलाओं के लिए असुरक्षित माहौल बन गया है। आंगनबाड़ी केंद्र में छोटे बच्चों को शिक्षा और पोषण प्रदान किया जाता है, लेकिन शराब दुकान की मौजूदगी के कारण अभिभावक अपने बच्चों को वहां भेजने में हिचक रहे हैं। स्थानीय निवासियों ने कई बार प्रशासन से शराब दुकान को हटाने की गुहार लगाई, जिसके बाद प्रशासन ने हटाने के आदेश जारी किए। लेकिन, आदेश केवल कागजों तक सीमित रह गए।सूत्रों के अनुसार, शराब ठेकेदारों का स्थानीय स्तर पर अच्छा-खासा प्रभाव है। यह प्रभाव इतना है कि प्रशासनिक आदेशों को लागू करने में आबकारी विभाग और स्थानीय अधिकारी निष्क्रिय बने हुए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शराब दुकान से होने वाली मोटी कमाई और कुछ प्रभावशाली लोगों का समर्थन इसकी वजह है। एक स्थानीय निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “शराब ठेका मालिकों का रसूख इतना है कि कोई भी अधिकारी उनके खिलाफ कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा। वही रवासियो का कहना है कि अगर प्रशासन शराब ठेके के आगे नतमस्तक है, तो कम से कम बच्चों की सुरक्षा के लिए आंगनबाड़ी केंद्र को दूसरी जगह ले जाया जाए। एक स्थानीय निवासी ने कहा, “हमारी मांग थी कि शराब दुकान हटे, लेकिन अगर प्रशासन ऐसा नहीं कर सकता, तो कम से कम हमारे बच्चों को सुरक्षित जगह पर पढ़ने का मौका तो दे।बैतूल के राजेंद्र वार्ड में शराब दुकान जो आंगनबाड़ी केंद्र के पास से नहीं हटाई जा रही जिससे यह साबित होता है कि प्रशासनिक नाकामी और रसूखदारों के प्रभाव के आगे कैसे नतमस्तक है। नन्हे बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा खतरे में बनी रहेगी। प्रशासन के सामने अब दो रास्ते हैं- या तो शराब दुकान को हटाकर नियमों का पालन करे, या फिर आंगनबाड़ी केंद्र को शिफ्ट कर बच्चों को सुरक्षित माहौल दे। सवाल यह है कि प्रशासन इनमें से कौन सा रास्ता अपनाएगा, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?
