Betul News: लोकसभा परिसीमन बिल और बैतूल को नगर निगम बनाने की जिद्द गिलास में हाथी को बैठाने जैसी!
लोकसभा परिसीमन बिल और बैतूल को नगर निगम बनाने की जिद्द गिलास में हाथी को बैठाने जैसी!

पुरानी बात है अकबर बादशाह के दरबार में एक बार शहज़ादा इस बात पर अड़ गया कि गिलास में हाथी को बैठाया जाएं अन्यथा खाना पीना सब बंद। अब सब परेशान हैरत में की गिलास में हाथी को कैसे बिठाया जाएं। उस समय राजा के दरबार में तीक्ष्ण बुद्धि के लोग ऐसी हठ करने वाली , स्वप्नदर्शी समस्याओं को हल करने के लिए सुलझे हुए लोग रखते थे। अकबर बादशाह के दरबार में उन्हें नवरत्न के नाम से पुकारा जाता था ,उन्हीं नवरत्नों में से एक बीरबल थे, उन्हें बुलाया गया समस्या बतलाई गई बीरबल ने एक कांच के गिलास में मिट्टी का छोटा सा हाथी बनाकर बिठा दिया, शहजादा हाथी को गिलास में बैठा देख बहुत खुश हुआ, बीरबल की चतुराई पर उसे बादशाह अकबर ने अशर्फियां भेट की।आजकल सत्ता के बादशाह भी शहजादे जैसी जिद्द पर अड़ जाते है , नहीं ऐसा ही होना चाहिए। परिसीमन बिल पास होना ही चाहिए, मां बाप बहुमत नहीं है हम कुछ नहीं जानते बिल पास होना ही चाहिए, पार्टियों को नहीं तोड़ सकते किस काम के दरबारी हो ।हम पूरा देश विदेश संभाल ले रहे हैं और तुमसे पचास साठ सांसद नहीं एरेंज हो रहे हैं। कुछ भी हो गिलास में हाथी को बैठना होगा परिसीमन बिल तो पास कराना रहेगा, नहीं तो बीरबल तुम्हारी नौकरी तो गई। अब बीरबल लगा है टी एम सी तोड़ , यूबीटी को मिला , डी एम के को मना, एन सी पी को ला, फिर भी तीन सौ साठ नहीं हो रहे मां बाप _तो एक काम करो विपक्ष के पच्चीस तीस सांसदों को मतदान के समय अनुपस्थित करवा दो लेकिन पच्चीस तीस कैसे अनुपस्थित हो सकते है सरकार। बड़ी संख्या है ।कुछ नहीं सभी को सर्दी जुकाम हो जाएं बस संसद में न आने पाएं सिर्फ इसलिए कि दूसरों को सर्दी जुकाम न हो जाएं इतना तो ध्यान रख ही सकते है, अपने साथी सांसदों का। कैसे भी हो बिल पास होना चाहिए।ऐसी ही जिद्द से प्रेरित होकर बैतूल को नगर निगम बनाने की जिद्द है, बनना ही चाहिए कुछ हो जाएं। जनसंख्या नगर निगम के लिए नहीं है तो क्या हुआ जनसंख्या बढ़ाई जाएं पर कैसे ? सारी आसपास की जनसंख्या को नगर की मान ली जाएं इसके बाद भी कम पड़ रही हैं। कैसे कम पड़ेगी सामन्य सी बात है जनसंख्या तो बढ़ती है। सर उसमे समय लगता हैं। कैसी बात करते हो चुनाव को अभी भी एक वर्ष है जनसंख्या तो नौ महीने में बढ़ जायेगी। अनुमानित जनसंख्या भी तो बताई जा सकती हैं ,इस आधार पर तो नगर निगम बन जायेगा सरकार हमारी है। मध्यप्रदेश की सबसे बड़ी नगर पालिका सारणी पाथाखेड़ा है उसे नगर निगम बनाया जा सकता है जितना कहा जाएं उतना करिए। अब हम महापौर को शपथ दिलवाने सारणी पाथाखेड़ा जाएं कुछ तो बोलने के पहले सोचा करो।सर अनुमानित जनसंख्या का आंकड़ा कैसे निकलेगा। क्यों नहीं निकल सकता, बजट बनता है, वह कैसे बन जाता है, सब अनुमानित ही तो रहता है , आज तक बजट में वास्तविक क्या रहा है ? सिर्फ कर्जे के आंकड़ों को छोड़कर।जब अनुमान से देश चल सकता हैं तो अनुमान से हम जनसंख्या बतलाकर नगर निगम नहीं बना सकते। अब इतनी सशक्त दलीलों के आगे सब चुप हैं, बीरबल अर्थात संसद में तथाकथित फ्लोर प्रबंधक और प्रशासन एक हाथ में कांच का गिलास दूसरे में मिट्टी का हाथी लेकर मुँह लटकाए परिसीमन का बिल और नगर निगम वाली जिद्द, के आगे बेबस खड़ा गिलास में हाथी को बैठालने का प्रयास करने लगा है।परिसीमन भी होगा, नगर निगम भी अवश्य बनेगा। आखिर सरकार में काबिज़ शहजादों की जिद्द है तो गिलास में हाथी क्यों नहीं बैठेगा? उसको बैठना ही होगा । आखिर परिसीमन, नगर निगम के विषय पर जनसंवाद और जनमत की राय क्यों नहीं ले ली जाती हैं।
हेमंत चंद्र दुबे बबलू
