Betul News:ग्राम पंचायत डोक्या में विकास के नाम पर भ्रष्टाचार का नंगा नाच
बिना ईंट रखे आठ लाख की फर्जी निकासी, अफसरों की चुप्पी बनी बड़ी सहमति
ग्राम पंचायत डोक्या में विकास के नाम पर भ्रष्टाचार का नंगा नाच
बिना ईंट रखे आठ लाख की फर्जी निकासी, अफसरों की चुप्पी बनी बड़ी सहमति

बैतूल :- भीमपुर ब्लाक के ग्राम पंचायत डोक्या अब विकास की नहीं, बल्कि घोटालों की मिसाल बनती जा रही है। “सघन बस्ती विकास योजना” के तहत स्वीकृत बाउंड्रीवॉल निर्माण कार्य में घोर भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ है, जहां 8 लाख रुपये का भुगतान कागजों में तो हो गया, लेकिन ज़मीन पर एक भी ईंट नहीं रखी गई थी। यह घोटाला ग्राम पंचायत डोक्या के पोषित ग्राम मेंढा की प्राथमिक शाला में सामने आया, जिसमें सरपंच और सचिव की मिलीभगत की बात सामने आ रही है।
जब अखबारों में आई खबर तब शुरू हुआ काम, वरना भ्रष्टाचार पर पड़ जाता पर्दा

प्रशासनिक लापरवाही या मिलीभगत? अधिकारियों ने नहीं किया मौका मुआयना 3 अक्टूबर 2023 को जारी हुई तकनीकी स्वीकृति क्रमांक 427 के तहत यह कार्य प्रस्तावित था और राशि स्वीकृत होते ही भुगतान भी कर दिया गया। लेकिन निर्माण कार्य शुरू ही नहीं हुआ। जब ग्रामीणों ने कार्यस्थल जाकर स्थिति देखी, तो न काम, न ईंट, न मजदूर – सिर्फ बिल भुगतान! जैसे ही यह मामला मीडिया की सुर्खियों में आया, आनन-फानन में निर्माण कार्य शुरू किया गया, लेकिन आधी दीवार बनते ही काम दोबारा बंद हो गया। यह साबित करता है कि अगर मीडिया ने मामला न उठाया होता, तो यह काम कभी शुरू भी नहीं होता।
अधिकारियों को नहीं जानकारी, सचिव का नाम तक नहीं जानते ग्रामीण
ग्राम पंचायत से लेकर शिक्षा विभाग तक सब चुप, आखिर क्यों?
जब इस मामले पर जनपद पंचायत भीमपुर के सीईओ से 29 मई 2025 को बात की गई, तो उन्होंने अनभिज्ञता जताते हुए कहा, “मुझे जानकारी नहीं है, मैं दिखवाता हूं।” यह बयान उनकी कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।गांव के लोगों को यह भी नहीं पता कि पंचायत सचिव कौन हैं। बताया जाता है कि सचिव सिर्फ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए गांव आते हैं। वहीं स्थानीय स्तर पर एक सत्ताधारी दल के वरिष्ठ जनप्रतिनिधि से पंचायत कर्मियों की गहरी साठगांठ की चर्चाएं भी हैं। इससे यह आशंका और गहरी हो जाती है कि अफसर कार्रवाई करने से बच रहे हैं।
स्कूल में हो रहा निर्माण, पर शिक्षा विभाग है बेखबर
प्रधान पाठक, बीआरसी और सब इंजीनियर की चुप्पी पर उठे सवाल
स्कूल परिसर में हो रहे इस निर्माण को लेकर प्रधान पाठक ने अपने उच्चाधिकारियों को सूचित क्यों नहीं किया? बीआरसी और शिक्षा विभाग के सब इंजीनियर अब तक मौन क्यों हैं? क्या उनकी यह चुप्पी भी मिलीभगत का हिस्सा है? जबकि 16 जून से स्कूल दोबारा खुल रहे हैं, तो प्रश्न उठता है कि क्या अधूरे निर्माण के बीच बच्चों की पढ़ाई सुरक्षित रह पाएगी? यदि निर्माण कार्य अब फिर शुरू होता है, तो यह पढ़ाई में बाधा बन सकता है।
घोटाले की जांच सिर्फ कागजों में, जमीनी कार्रवाई नदारद
यह पूरा प्रकरण न सिर्फ ग्राम पंचायत डोक्या की भ्रष्ट कार्यप्रणाली को उजागर करता है, बल्कि जनपद और जिला स्तर के अफसरों की निष्क्रियता को भी सामने लाता है। कहीं न कहीं, यह भ्रष्टाचार को संरक्षित करने जैसी स्थिति बनाता है।यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं की गई और दोषियों पर कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह समझ लेना चाहिए कि भ्रष्टाचार अब ग्राम पंचायतों में भी ‘नियमित व्यवस्था’ बन चुका है।
भ्रष्टाचार की यह पहली परत है, अभी कई परते खुलनी बाकी हैं
प्रशासनिक चुप्पी ने खोखली कर दी ‘विकास’ की परिभाषा अनोखा सच न्यूज ने जब इसकी पड़ताल की तो पंचायत डोक्या से जुड़े कई और फर्जीवाड़ों की जानकारी सामने आ रही है, जिन पर जल्द ही रिपोर्ट तैयार की जा रही है। सवाल यह है कि क्या जिला पंचायत का तेजतर्रार अमला आंखें मूंदे रहेगा, या फिर यह परतें खोलने का जिम्मा भी पत्रकारिता को ही उठाना होगा?निष्कर्ष में यही कहा जा सकता है कि डोक्या पंचायत का यह मामला प्रशासन के मुंह पर तमाचा है। अब ज़रूरत है सख्त जांच और जिम्मेदारों पर त्वरित कार्रवाई की, ताकि जनता का लोकतंत्र और विकास दोनों पर से भरोसा ना उठे।
