Betul Tricolor Day:बैतूल तिरंगा दिवस पर केक काटकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय में बनाया गया तिरंगा दिवस
बैतूल तिरंगा दिवस पर केक काटकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय में बनाया गया तिरंगा दिवस

बैतूल भारत की आन, बान और शान कहे जाने वाले तिरंगे झंडे का हर भारतीय सम्मान करता है. हम हर साल 22 जुलाई को तिरंगा दिवस मनाते हैं. इस तारतम में आज पुलिस अधीक्षक कार्यालय बैतूल में बैतूल संस्कृतिक सेवा समिति द्वारा तिरंगा दिवस मनाया गया जहां पर पुलिस अधीक्षक निश्चल झरिया के काटा एवं सभी ने तिरंगा दिवस मनाया बैतूल संस्कृतिक सेवा समिति के सदस्यों ने सभी को तिरंगा का बैच लगाकर सम्मान किया आपको बता दे की तिरंगा भारत का राष्ट्रीय ध्वज है. 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा में तिरंगा को राष्ट्रीय ध्वज स्वीकार किया गया।जब भी हम अपने देश के तिरंगे को देखते हैं तो हमारा दिल शान, गर्व और देशभक्ति से भर जाता है। तिरंगा न सिर्फ़ हमारे देश की एकता और अखंडता का प्रतीक है, बल्कि यह भारत की पहचान का प्रतीक है आज जिस डिजाईन को भारत के तिरंगे के लिए इस्तेमाल किया जाता है, वह एक महिला स्वतंत्रता सेनानी ने बनाया था।एक अंग्रेज़ इतिहासकार ट्रेवर रोयेल ने अपनी किताब ‘द लास्ट डेज़ ऑफ़ राज’ में लिखा है कि भारत का अंतिम राष्ट्रीय ध्वज सुरैया तैयबजी ने बनाया था।साल 1919 में हैदराबाद (आंध्र प्रदेश, अब तेलंगाना की राजधानी) में जन्मी सुरैया एक प्रतिष्ठित कलाकार थीं। उन्हें अक्सर समाज के प्रति अपने प्रगतिशील विचारों के लिए जाना जाता है। उनकी शादी बदरुद्दीन तैयबजी से हुई, जो एक भारतीय सिविल अधिकारी थे और बाद में, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति भी बने।सुरैया संविधान सभा के तहत विभिन्न समितियों की सदस्य थीं और उनमें से कई में प्रमुख भूमिकाएँ निभा चुकी हैं। वे काफ़ी कलात्मक और बहु-प्रतिभाशाली थीं।
बदरुद्दीन और सुरैया तैयबजी
सुरैया से पहले भी बहुत से लोगों ने समय-समय पर ध्वज के डिजाईन दिए थे। इन लोगों में भगिनी निवेदिता, मैडम कामा, एनी बेसेंट, लोकमान्य तिलक और पिंगली वेंकैया जैसे नाम शामिल हैं।साल 1921 में पहली बार महात्मा गाँधी ने कांग्रेस के सम्मेलन में अपना एक ध्वज बनाने की बात उठाई थी। उसके बाद ही फ़ैसला हुआ कि भारत का अपना एक झंडा, एक ध्वज होगा, जो कि भारत का एक राष्ट्र के तौर पर प्रतिनिधित्व करेगा। उन्होंने कहा,यह हम सब भारतीयों (हिन्दू, मुस्लिम, इसाई, यहूदी, पारसी, और वो सभी लोग जिनके लिए भारत उनका घर है) के लिए बहुत जरूरी है कि हमारा अपना एक ध्वज हो, जिसके लिए हम जिए और मर सकें।”गाँधी जी के इस विचार से प्रभावित होकर बहुत से सेनानी और क्रांतिकारियों ने ध्वज के लिए डिजाईन विकल्प के तौर पर दिए। इनमें से गाँधी जी ने एक झंडे को स्वीकृति दी।
