Betul News:जब शासन प्रशासन से उम्मीदें टूटीं, तो खुद उठाया फावड़ा
धौल के ग्रामीणों ने बना दी एक किलोमीटर सड़क
जब शासन प्रशासन से उम्मीदें टूटीं, तो खुद उठाया फावड़ा
धौल के ग्रामीणों ने बना दी एक किलोमीटर सड़क

बैतूल। जब नेता खामोश हो गए, सिस्टम ने मुंह मोड़ लिया, तब धौल गांव के लोगों ने खुद मोर्चा संभाल लिया। कीचड़ और जर्जर रास्ते की मार झेल रहे ग्रामीणों ने उम्मीदों की जगह जमीनी हकीकत को चुना और अपनी मेहनत, चंदा व किराए की जेसीबी से एक किलोमीटर सड़क तैयार कर डाली। ब्लाक बैतूल के ग्राम धौल के ग्रामीण वर्षों से कच्ची सड़क की परेशानी झेल रहे थे। धौल ढाना से ग्राम लापाझिरी तक पहुंचने के लिए 5 किलोमीटर का कच्चा रास्ता ही एकमात्र सहारा था। बारिश में यह रास्ता कीचड़ से भर जाता और आवागमन ठप हो जाता। इस मार्ग से किसानों के खेत भी जुड़े हुए हैं, जिससे बरसात के मौसम में खेती तक पहुंचना भी मुश्किल हो जाता था।ग्रामीणों ने कई बार पंचायत प्रतिनिधियों, जनपद सदस्य, जिला पंचायत सदस्य, विधायक और सांसद से गुहार लगाई, लेकिन कहीं से भी सहयोग नहीं मिला। ग्राम पंचायत के सरपंच, जनपद सदस्य, जिला पंचायत सदस्य, विधायक और सांसद सभी भाजपा से जुड़े होने के बावजूद इस समस्या की अनदेखी करते रहे। जब ग्रामीणों ने देखा कि कहीं से उम्मीद नहीं बची, तो उन्होंने स्वयं सड़क बनाने का निर्णय लिया।गांव के युवाओं और बुजुर्गों ने आपस में मिलकर चंदा इकट्ठा किया। कुल 50 हजार रुपये जमा किए गए। फिर जेसीबी किराए पर लेकर बोल्डर और मुरम निकलवाए गए। ट्रैक्टर-ट्रालियों की मदद से 5 किलोमीटर लंबे कच्चे मार्ग में से एक किलोमीटर हिस्से पर एक फीट ऊंची सड़क तैयार कर दी गई। ग्रामीणों का कहना है कि यह कार्य सिर्फ शुरुआत है, बाकी हिस्से की सड़क भी ग्रामीण अपने प्रयासों से बनाना चाहते हैं। इस कार्य में उपसरपंच आशाराम वरकडे, रतन भलावी, माडुसिंह वरकड़े, सिडुसिंह वरकड़े, अशोक वरकड़े, जयपाल वरकड़े, शिवकिशोर वरकड़े, नंदकिशोर वरकड़े, कुंदन भलावीं, कीर्तिराम वरकड़े, भारत वरकड़े, बलवंत वरकड़े, रामकिशोर धुर्वे, प्रेम भलावीं, मूलचंद वरकड़े, लक्ष्मण धुर्वे, सेवकराम गावंडे, रामपाल वरकड़े, भगु वरकड़े, राजू वरकड़े, संतु काकोड़िया, रामसिंग वरकड़े, जग्गू भलावीं, फाटू उइके, चेतनराम इंगरे सहित दर्जनों ग्रामीणों ने योगदान दिया। रतन भलावीं ने बताया कि पंचायत प्रतिनिधियों ने पूरी तरह से इस विषय पर चुप्पी साध ली थी। सभी स्तर के जनप्रतिनिधियों से मदद की मांग की गई लेकिन नतीजा शून्य रहा। इसलिए गांववासियों ने स्वयं आगे बढ़कर कार्य किया और आने वाले समय में बाकी सड़क भी ग्रामीण अपने सहयोग से बना लेंगे।
