Police News:वर्दी की ‘इज्जत’ पग-पग पर नीलाम क्यों?
क्या वर्दी का डर और सम्मान खत्म?
वर्दी की ‘इज्जत’ पग-पग पर नीलाम क्यों?
क्या वर्दी का डर और सम्मान खत्म?

मध्यप्रदेश भोपाल से लेकर बिहार तक पुलिस पर हमले बढ़ते जा रहे हैं। वर्दी का वह डर और सम्मान, जो कभी लोगों के दिलों में था, अब कहीं खो सा गया है।वर्दी के प्रति लोगों के मन में अब न तो वो खौफ रहा है और न ही कथित रूप से वह इज्जत। चंद फीसदी वर्दी वालों को छोड़ दें तो अधिकांश के मन में अब दूसरी भावना रहती है। मध्य प्रदेश हो या देश का कोई अन्य प्रदेश… किसी भी थाना क्षेत्र में जाकर आप पीड़ितों से बात कर लीजिए। पुलिसवालों के प्रति उनके बारे में क्या ख्याल आते हैं। थानों में पदस्थ अधिकांश पदाधिकारी वर्दी को चंद रुपए के लिए ‘गिरवी’ रख देते हैं। एमपी के मऊगंज में घटी घटना भी उसकी बानगी कह सकते हैं। पुलिस आदिवासियों का भरोसा नहीं जीत पाई।
मऊगंज में एएसआई रामचरण गौतम की हत्या
एमपी के मऊगंज में एक एएसआई की हत्या कर दी गई। यह घटना तब हुई जब एक युवक की मौत को पुलिस ने सड़क हादसा बताया, लेकिन मृतक के परिवार और ग्रामीणों को भरोसा नहीं हुआ। उन्होंने इसे हत्या बताया और सही जांच की मांग की। जब पुलिस ने इसे सड़क हादसा मानकर केस बंद कर दिया, तो आक्रोशित आदिवासियों ने एक ब्राह्मण युवक को पकड़कर पीटना शुरू कर दिया। जब पुलिस उसे बचाने पहुंची, तो ग्रामीणों ने हमला कर दिया, जिससे एएसआई रामचरण गौतम की मौत हो गई।
इंदौर में पुलिस की पिटाई, अपराधियों का हौसला बुलंद
इंदौर में कुछ अपराधियों ने पुलिस के एक एएसआई को कार में बैठाकर बुरी तरह पीटा। इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस की छवि और खराब हो गई। हालांकि बाद में अपराधियों पर कार्रवाई की गई, लेकिन यह सवाल उठता है कि आखिर अपराधियों के हौसले इतने बुलंद कैसे हो गए कि वे वर्दीधारी को भी नहीं बख्शते कई बार पुलिस कर्मियों का नाम जुए, सट्टेबाजी जैसी अवैध गतिविधियों में सामने आता है। हालांकि पूरी पुलिस फोर्स को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, लेकिन कुछ भ्रष्ट अधिकारियों के कारण पूरी व्यवस्था पर सवाल उठने लगते हैं। इसका असर यह होता है कि आम जनता का पुलिस पर से भरोसा खत्म होने लगता है और वे खुद कानून हाथ में लेने पर मजबूर हो जाते हैं।
राजनीतिक दबाव में फंसी पुलिस
मध्य प्रदेश में कई मामलों में देखा गया है कि पुलिस पर राजनीतिक दबाव बहुत अधिक होता है। इस दबाव के चलते पुलिस सही और गलत का निर्णय नहीं ले पाती, और पीड़ितों को न्याय मिलने में देरी होती है। छोटी-छोटी एफआईआर दर्ज करवाने के लिए भी आम आदमी को कई बार थाने के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
वर्दी की इज्जत कैसे लौटे?
अगर पुलिस को समाज में अपना सम्मान वापस पाना है, तो उसे खुद को ईमानदार और निष्पक्ष बनाना होगा। भ्रष्टाचार के मामलों में सख्त कार्रवाई करनी होगी। पुलिसकर्मियों को संवेदनशीलता के साथ काम करना होगा ताकि आम जनता का उन पर विश्वास बना रहे। वर्दी की बोली लगाकर न्याय को बेचा जाएगा, तो जनता का आक्रोश इसी तरह बढ़ता रहेगा और कानून व्यवस्था चरमराती रहेगी।
इनका कहना है
मऊगंज की घटना के बाद डीजीपी कैलाश मकवाना से सवाल किए गए। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि पीड़ित परिवार को पूरा समर्थन मिलेगा।
डीजीपी कैलाश मकवाना
